गोवा के प्लान पर पनौती लगी हो तो महाराष्ट्र के अलीबाग घूम आइए

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गोवा का तो प्लान ही कैंसिल होने के लिए बनता है, जाहिर है हर साल आप भी गोवा जाने का प्लान बनाते ही होंगे लेकिन आखिरी वक्त में प्लान कैंसिल भी हो जाता होगा। ऐसा अगर आपके साथ भी होता है तो आप गोवा की जगह अलीबाग का प्लान बना सकते हैं। अलीबाग को महाराष्ट्र का गोवा कहा जाता है। 15 अगस्त वाले हफ्ते में लंबी छुट्टी मिली, तो मैंने भी मिनी गोवा का प्लान बना ही लिया। तो चलिए करते हैं अलीबाग की सैर। और आइए, जानते हैं क्या है आपके लिए खास।

अलीबाग दक्षिणी मुंबई से लगभग 35 किलोमीटर दूर पड़ता है, पहले मैंने गेटवे ऑफ इंडिया से फेरी से जाने का प्लान बनाया था, लेकिन बरसात के कारण फेरी नहीं चल रही थी। तो मैंने दादर से पनवेल की लोकल पकड़ी और पनवेल से सिर्फ 100 रुपए की शेयरिंग टैक्सी ली। चूंकि मैंने होटल नगांव बीच पर लिया था तो मुझे अलीबाग से अॉटो करनी पड़ी।

होटल में सुस्ताने के बाद जब नगांव बीच पहुंची तो नजारा देखकर सफर की थकान दूर हो गई। दूर दूर तक फैला समुद्र और किनारे लंबे खजूर के पेड़। दूर-दूर तक फैली शांति। किनारे पड़े बेंच पर बैठकर बीच का आनंद लेने का अपना अलग ही मजा था। नगांव बीच घूमने के बाद मैं निकली अलीबाग बीच के लिए। इसी जगह पर कोलाबा किला है, जिसे 1652 वीं शताब्दी में शिवाजी ने बनवाया था। यहां समुद्र किनारे सैर करने के लिए तांगे भी मिलते हैं, जो 100-150 रुपए में पूरे बीच के चक्कर लगाते हैं।

अलीबाग बीच, नगांव बीच के अलावा वरसोली बीच भी काफी मशहूर है। अब बात आती है खाने की, यहां पर कोंकण थाल काफी पसंद की जाती है, तो अलीबाग आइए तो कोंकण थाल जरूर खाएं। इसमें आपको वेज और नॉन वेज दोनों के ऑप्शन मिल जाएंगे। सोलकढ़ी जरूर खाइएगा, ये कोकम और नारियल से बनती हैं जो शरीर के लिए भी बहुत फायदेमंद है। वहीं नॉनवेज कोंकण थाल में फिश का भी मजा ले सकते हैं।

खाने पीने के बाद अब बात आती है शॉपिंग की। तो शॉपिंग के लिए अलीबाग में कुछ खास है नहीं लेकिन रायगढ़ बाजार से कुछ देसी मसालें और अचार खरीद सकते हैं। वहीं कोंकण बाजार से भी अचार और पापड़ या फिर कोकम का जूस खरीद सकते हैं। मेरे लिए ये ट्रिप बहुत यादगार रही, क्योंकि इस वक्त यहां का मौसम सुहावना था।


ये तमाम जरूरी बातें हमें लिख भेजी हैं शालू अवस्थी ने। शालू पत्रकार हैं, महाराष्ट्र में रहती हैं। जब से यहां रहने आई हैं, घूमने की जितनी भी दबी आकांक्षाएं थीं, उनको पंख लग गए हैं। बताती हैं कि अब तो हर वीकेंड निकल लेती हैं कहीं न कहीं घूमने। धुन सवार है कि जितना घूम सकें उतना घूम डालें, बस घूम डालें। स्वादिष्ट व्यंजनों में जान बसती है। फोटो खिंचवाना पसंदीदा शगल है। 


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