दिल जीत लेता है आंध्रप्रदेश, यकीन न हो तो खुद घूम आओ

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आंध्र प्रदेश अपनी समृद्ध संस्कृति, इतिहास और वास्तुकला के लिए जाना जाता है। आंध्र प्रदेश को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा जाता है। यहां पर सतहत्तर फीसदी से ज्यादा खेती चावल की होती है। इस राज्य में दो प्रमुख नदियां, गोदावरी और कृष्णा बहती हैं। ये तो हो गई है सामान्य ज्ञान वाली जानकारी। अब आते हैं असल मुद्दे पर और आपको बताते हैं वो जगहें जो जहां आंध्र प्रदेश की सारी खूबसूरती राज करती है।

लक्नवरम झील

वारंगल शहर से करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये जल निकाय दस हजार एकड़ में फैला हुआ है। यह जगह सैकड़ों साल पहले बसी सिविलाइजेशन की साक्षी है। कई दशकों तक खुदाई करके इस झील का निर्माण किया गया था। इस झील से इस क्षेत्र में कृषि की मदद होती है। इस झील में 13 द्वीप हैं जो हरे भरे वनों और पहाड़ों से घिरे हैं। इनमें से दो द्वीपों में आरामदायक आवास भी हैं। ये रिहायशी द्वीप पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण हैं। लक्नवरम झील का नाम लक्ष्मण के नाम पर पड़ा है। लक्नवरम झील का जल संग्रह क्षेत्र 75 वर्ग मील है। इस झील से तीन नहरें काटी गई थीं, जिनसे तेरह सहस्र एकड़ भूमि की सिंचाई हो सकती थी। झील का निर्माण तीन संकीर्ण घाटियों को बांध द्वारा रोक कर किया गया था।

क्रेडिट- विकीपीडिया

नागार्जुन सागर

गुंटूर और नालगोंडा जिलों की सीमाओं पर स्थित नागार्जुन सागर बांध, देश में हरित क्रांति के समय में सरकार द्वारा बनाई गई सबसे प्रारंभिक संरचनाओं में से एक है। झील के चारों ओर होटल खड़े हैं जो बांध के चारों ओर एक शांत रचना और शांत दृश्य प्रदान करते हैं। खुदाई साइट, रोमन काल से प्रेरित है और एक द्वीप पर निर्मित संग्रहालय में बुद्ध के अवशेष इतिहास प्रेमियों  को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।  इस बांध से निर्मित नागार्जुन सागर झील दुनिया की तीसरी सब से बड़ी मानव निर्मित झील है।

क्रेडिट- विकीपीडिया

वारंगल का किला

वारंगल जिले में स्थित इस किले में कब्रों की खूबसूरती से नक्काशी की गई है। यहां आठ खण्डों के त्रिज्या में खंभे फैले हुए हैं। किले में काकातिया साम्राज्य का सिहांसन मौजूद है। 11 वीं शताब्दी में निर्मित हजार पालार मंदिर एक और पर्यटन आकर्षण है। इसे दक्षिण भारतीय वास्तुकला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना जाता है। गणपतिदेव ने 1199 ई0 में किले की शुरुआत कराई थी लेकिन इसका निर्माण उनकी पुत्री रानी रुद्रामा देवी के समय में 1261ई0 में पूरा हुआ। वर्तमान में खण्डहर बन चुके इसके लिए  कि दो दीवारों के साथ-साथ चार विशाल प्रवेश द्वार सांची शैली में हैं। जो लोग वास्तुकला, इतिहास और प्राचीन इमारतों के शौकीन हैं, उन्हें किले और इसके आसपास से काफी जानकारी प्राप्त हो जाती है।

गोलकुंडा किला

हैदराबाद की राजधानी शहर में स्थित है। यह किला 13 वीं शताब्दी के दौरान काकतिया शासकों द्वारा पहले किले का निर्माण किया गया था। हालांकि, कुतुब शाही राजवंश का विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा यहां पाया गया था। यहां एक अतिरिक्त आकर्षण शाम में होने वाला ध्वनि और लाइट शो है। गोलकुंडा किले की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक है ध्वनि की अपनी प्रणाली। अगर कोई प्रवेश द्वार पर ताली बजाता है तो 1 किमी दूर ‘बाला हिसार’ में सुना जा सकता है। यह ग्रैनाइट की एक पहाड़ी पर बना है जिसमें कुल आठ दरवाजे हैं और पत्थर की तीन मील लंबी मजबूत दीवार से घिरा है। यहां के महलों तथा मस्जिदों के खंडहर अपने प्राचीन गौरव की कहानी सुनाते हैं।  दुर्ग के दक्षिण में मूसी नदी बहती है। दुर्ग से लगभग आधा मील दूर उत्तर में कुतबशाही राजाओं के ग्रैनाइट पत्थर से बने मकबरे हैं। जो टूटी फूटी अवस्था में अब भी मौजूद हैं।

क्रेडिट- विकीपीडिया

अरकू

अरकू घाटी विशाखापट्टनम जिले में एक प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। विशाखापट्टनम से 112 किलोमीटर दूर स्थित ये हिल स्टेशन झरने और धाराओं के साथ- साथ अपने प्राकृतिक उद्यान के लिए जाना जाता है। यह जगह शायद दक्षिण में सबसे खूबसूरत हिल स्टेशन है। घाटी की सुंदरता को टॉलीवुड फिल्मों में भी प्रदर्शित किया गया है।

क्रेडिट- विकीपीडिया

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