कश्मीर 6: कश्मीर-भारत के रिश्ते की सबसे बड़ी खाई है, संवाद का ना होना

0
530
views

कैफे में खातिरदारी के दौरान बातचीत का दौर शुरू हो गया। बातचीत के दौरान पता चला कि पुलिस और मिलिटेंट्स के बीच हुई एनकाउंटर में हिजुबल का कमांडर मन्नान वानी मारा गया है। मेरी दोस्त परेशान थी कि मन्नान की मौत के बाद कश्मीर में हालात बुरहान वानी की मौत के बाद जैसे ना हो जाएं। कश्मीरी में बातचीत होने की वजह से हमें ज्यादा समझ तो नहीं आ रहा था। लेकिन बीच-बीच में हिंदी में बातचीत हो रही थी। जिससे ये पता चल रहा था कि वहां मौजूद हर शख्स मन्नान वानी की मौत से दुखी था।

वहां के लोगों की मानें तो दिल्ली और इंडियन आर्मी बेहद सेफ तरीके से गेम खेल रही है। मरने वाला चाहे मिलिटेंट हो या जम्मू-कश्मीर पुलिस का जवान, दोनों ही कश्मीरी हैं। उनकी मानें तो हाल-फिलहाल में जितने भी जम्मू-कश्मीर पुलिस की हत्या हुई है, उसमें एजेंसी का हाथ है। क्योंकि मिलिटेंट्स अगर किसी को मारते हैं तो वो न्यूज देते हैं और मारने की वजह भी। अगर कोई सफाई नहीं आई तो इसमें एजेंसी का हाथ होता है।

 

मन्नान वानी के एनकाउंटर को लेकर अगले दिन पूरे कश्मीर में बंद बुलाया गया था। जिन बच्चों के एग्जाम होने थे वो होल्ड कर दिए गए। इंटरनेट बंद होने वाला था। लोकल गाड़ियां नहीं चलने वालीं थीं। कैफे में बैठे दोस्तों के बीच हम बेहद अजीब सा महसूस कर रहे थे कि यहां के लोग कैसे जीते हैं? नौजवान बिना इंटरनेट सर्वाइव कैसे करते हैं। हम दोनों से जब नहीं रहा गया तो हमने ये सवाल पूछ ही लिया। जवाब आया कि हम क्या करें! हमारे पास कोई विकल्प नहीं है।

हालात सच में खराब हैं

जब बुरहान वानी मारा गया था। तब हम सब छः महीने घर में बंद रहे थे। ना कॉलेज जा सकते थे, ना इंटरनेट था और ना ही बाहर निकल सकते थे। एकमात्र सहारा न्यूजपेपर होता था। इन सारी बातों को सुनकर मैं असमंजस में थी कि यहां तो ऐसे हालात हैं कि आप किसी को गलत नहीं कह सकते हैं। यहां के नौजवानों को देखकर आप खुद को लकी मानने लगते हैं। उसकी वजह भी है। यहां जब हालात खराब होते हैं तो महीनों नेट, स्कूल-कॉलेज, मार्केट बंद।

 

हमारे बिहार में एजुकेशन सिस्टम की मेहरबानी से छात्र तीन साल का ग्रेजुएशन चार-पांच साल में पूरा करते हैं, हालात की वजह से। यहां के नौजवान भी बहुत सारे चीजों से वंचित हैं। देश-दुनिया में क्या चल रहा है उन्हें नहीं पता? फिल्मी जगत, साहित्य जगत, अलग-अलग फील्ड के बहुत सारे फेमस नाम नहीं पता। पूछो तो जवाब होता है कि जब आप महीनों कर्फ्यू की वजह से घर में बंद हो तो आप क्या सोच सकते हो? उनका जवाब एक हद तक सही भी लगता है।। बचपन से अगर ऐसा ही माहौल हो तो फिर इंसान वैसा ही सोचने लगता है। उसके पास हालात से बाहर सोचने का मौका नहीं होता या सोच ही नहीं पाएगा।

कश्मीर यूनिवर्सिटी

खुशगहमी की चादर

ये सारी चीजें सोचकर दिमाग फटा जा रहा था, हम वहां से घर की तरफ लौटे। बाहर का माहौल और बातें सुनकर मैं जितनी अपसेट थी, घर पहुंचते ही कुछ देर में सबकुछ भूल गई। वजह घर में मौजूद बच्चे-बच्चियां जो सपना चौधरी की बहुत बड़ी फैन थीं और उन्हें उसके गाने पर डांस करना था। उनकी डिमांड पर हमने सपना चौधरी का गाना ‘तेरी आंख्या का काजल’ बजाया और फिर हम सबने जमकर डांस किया। एक दिन में ही हम वहां के लोगों से ऐसे घुल मिल गए कि लग ही नहीं रहा था कि हम मेहमान हैं।

भले ही कश्मीर के लोग खुद का जुड़ाव भारत से नहीं महसूस करते हों या वहां के लोग खुद को भारत का हिस्सा नहीं मानते हों लेकिन कुछ चीजें हैं जो उन्हें भारत से जोड़कर रखता है और इस मामले में वे पूरे भारतीय हैं। हमारे यहां घर-घर में बिग बॉस, बालिका वधू (रिपीट टेलीकास्ट) या बाकी सीरियल्स देखते हैं। कश्मीर में भी लोग वही देखते हैं। मुझे ये बात तब पता चली, जब वहां पर मौजूद सात साल की बच्ची हमें ड्रामा (सीरियल्स) देखने के लिए पूछती है। वहां के लोग खूब पंजाबी गाने सुनते हैं।

दूसरी बार तब लगा था जब हमारी गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस वालों ने उठाया था और हम ट्रैफिक पुलिस स्टेशन का चक्कर लगा रहे थे। उस दौरान ट्रैफिक पुलिस वाले से हम गुहार लगा रहे थे कि अरे सर छोड़ दो। वैसे भी आपके ही ऑफिसर ने हमें उस जगह गाड़ी पार्क करने को कहा था। सामने से जवाब आया-मैडम हिंदुस्तान से हो? जो नियम हिंदुस्तान में चलता है, वहीं यहां भी चलता है। उस जवाब को सुनकर समझ आया कि पुलिस चाहे बिहार की हो या कश्मीर की, होती एक जैसी ही है। बाकी एक फीलिंग ये भी थी कि हम किसी दूसरे देश में हैं, जो देश जबरदस्ती हिंदुस्तान के नियम को फॉलो करती है। डांस के बाद हम सबने खाना खाया। चेंज करने के लिए हमें कपड़े मिले, हमारा बिस्तर लगाया गया। गर्म पानी का बैग (हॉटबैग) दिया गया ताकि ठंड से बचे रहें।

(अभी यात्रा जारी है, आगे का विवरण यहां पढ़ें)


कश्मीर की अपनी इस यात्रा के बारे में हमें लिखकर भेज रही हैं भारती द्विवेदी। भारती दिल्ली में पत्रकार हैं। मूलतः बिहार की हैं। इनकी शान में दोस्त लोग इन्हें ‘मनमौजी बिहारन’ कहकर पुकारते हैं। तेजस्वी नयनों की मालकिन हैं, मुंहफट हैं, बेबाक हैं और बहुत ही ज्यादा प्यारी हैं, दरवाजे पर लटके विंडचाइम की माफिक। ये लिखने पर हमें इनकी तरफ से उलाहना आएंगी लेकिन एक अभिनेत्री हैं, तापसी पन्नू। उनकी शक्ल हूबहू भारती से मिलती है।


ये भी पढ़ेंः

कश्मीर 2ः कश्मीर जाने के लिए हिम्मत नहीं, अलग नजरिए की जरूरत है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here