पचमढ़ी यात्रा 3: जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा चौरागढ़

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मध्यप्रदेश की शान पचमढ़ी में धूपगढ़, पांडव गुफाएं, जटाशंकर मंदिर जैसी कई नायाब जगहों पर घूमने के बाद अब हमारा अगला पड़ाव था चौरागढ़ मंदिर। जो पचमढ़ी शहर से 10 किलोमीटर दूर है। यहां पर एक लंबी चढ़ाई कर मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर तक करीब 1300 सीढियों और कुछ किलोमीटर का रास्ता है। चूंकि हमें शाम को वापस लौटना भी था इसलिए एक बार लगा कि ऐसा न हो हमें उतरने में देर हो जाए और हम शाम को वापस न निकल पाएं। चढ़ाई के बारे में काफी सोच-विचार के बाद निष्कर्ष निकला कि हमें चढ़ना चाहिए। जंगल और पहाड़ के ऊंच-नीचे रास्ते से होते हुए हम करीब 3 घंटे की चढ़ाई के बाद मंदिर पहुंचे।

आगे चौरागढ़ मंदिर तक जाने के लिए एक बेहद संकरा रास्ता है। बिना किसी बैग के शरीर को बिल्कुल स्थिर रखते हुए इस करीब 20 फीट के रास्ते से होते हुए आपको मंदिर तक जाना होता है। मंदिर के इस रास्ते में अमरूद, जामुन और चिरौंजी के ढेरों पेड़ हैं। अंदर किसी तरह की भगदड़ न हो इसलिए एक बार में सिर्फ 4-8 लोग ही अन्दर जाते हैं। उनके आने के बाद ही अगले ग्रुप को अन्दर भेजा जाता है। यहां पर लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी करवाने के लिए त्रिशूल चढ़ाते हैं। काफी समय पहले मंदिर में एक भव्य त्रिशूल रखा रहता था हालांकि अब वो अब नजर नहीं आता।

इस खूबसूरत सफर का आखिरी प्वाॅइंट हमने चौरागढ़ में खत्म किया। यहां से उतरकर हम फिर पचमढ़ी के उस मुख्य चैराहे पर थे, जहां से हमने अपने सफर की शुरुआत की थी। शाम के साढ़े पांच बज रहे थे। अभी हमें करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय करनी थी।

बारिश ने ली हमारी खबर

हमें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि इस सफर का सबसे खराब समय सबसे अंत में शुरू होगा। पचमढ़ी को बाय बोलने के साथ पहाड़ो पर धुंआधार बारिश शुरू हो गई। एक बार सोचा कि बारिश रुकने का इंतजार किया जा सकता है। फिर लगा ये पहाड़ों की बारिश है, जो न जाने कितने घंटों चलेगी। वापस पचमढ़ी जाने को कोई ख्याल नहीं था। अब हमें सिर्फ सीधे जाना था इसलिए हम निकल पड़े।

पहाड़ों के घुमावदार रास्ते ऊपर से सुई की तरह चुभने वाली ठंडी बारिश की बूंदों से लड़ते हुए जैसे-तैसे हम आगे बढ़ रहे थे। हमें पचमढ़ी से 50 किलोमीटर दूर पिपरिया टाउन तक पहुंचना था। उसके बाद रास्ते सीधा था जिस पर आराम से चला जा सकता था। पहाड़ी रास्ते पर भीगते-भागते करीब 7 बजे हम पिपरिया पहुंचे।

यहीं पचमढ़ी का सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन है जहां से आपको आसानी से पचमढ़ी के लिए बस या गाडियां मिल जाती हैं। सिर से लेकर पैर तक भीगने के बाद चाय की कुछ चुस्कियों के साथ हमने यहां अपने गले को गर्मी दी। कुछ देर इंतजार किया। फिर दिल में यादों की एक लड़ी लिए निकल गए।

( ये प्रशांत की पचमढ़ी यात्रा का आखिरी भाग है, पहले दो भाग यहां पढ़ें )


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