बस्तर 13: बस्तर घूमते वक्त उतना खौफ नहीं लगा, जितनी वीभत्स ‘महाराजा’ की बातें थीं

0
917
views
क्रेडिट: फेसबुक/ कमल चंद्र भंजदेव

( इस यात्रा का पिछला भाग यहां पढ़ें)

हमारी गाड़ी बस्तर राजमहल के प्रवेशद्वार से अंदर घुसती है। सबसे पहले मां दंतेश्वरी का मंदिर दिखाई पड़ता है। वही दंतेश्वरी, जिनके नाम पर दंतेवाड़ा नाम का अस्तित्व है। गेट पर कई सारे भिखारी बैठे हुए थे। हम मुख्य महल तक पहुंचते हैं। एंट्री करते ही एक बड़ा हॉल आता है। जिसकी हर एक दीवार पर बस्तर के पूर्व राजा और रानियों की तस्वीरें लगी हुई थी। जंगली भैंसों के सिर भी टंगे हुए थे। बीच की दीवार पर उन राजा की तस्वीर लगी थी, जिनकी हत्या के बाद बस्तर में नक्सलवाद ने अपने पैर भयंकर तरीके से जमा लिए थे। ये राजा प्रवीण भंज की तस्वीर थी।

उस तस्वीर के सामने दो सिंहासन जैसी कुर्सियां भी रखी थीं। हमें हॉल से सटे एक कमरे में बिठाया दिया गया। थोड़े इंतजार के बाद कमरे में धोती-कुर्ता पहने और ललाट पर तिलक लगाए एक साधारण कद काठी का मनुष्य प्रवेश करता है। यही हैं भंज राजवंश के मौजूदा प्रतिनिधि कमल देव भंज।

कमल आते ही सबसे पहले अपने लंदन के कॉलेज और घर वगैरह के बारे में बताते हैं। फिर काफी देर तक अपने प्राइवेट हेलीकॉप्टर से बस्तर के सुदूर इलाकों में की गईं यात्राओं के बारे में ब्यौरा देते हैं। कमल राजनीति में बीजेपी से ताल्लुकात रखते हैं। उनके शब्दों के मुताबिक, छतीसगढ़ की राजनीति में उनका काफी दबदबा है। राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी अच्छी पूछ है। कमल ने ये भी बताया कि राहुल गांधी और वो अच्छे दोस्त हैं।

राहुल गांधी और उनकी दोस्ती का जिक्र सुनते ही मुझे इन दोनों युवाओं में काफी समानताएं सूझ गईं। दोनों ही बहुत ही प्रभावशाली परिवारों से आते हैं, दोनों ने ही कम उम्र में अपने पिता को खो दिया। शायद दोनों का ही राजनीति में आना पूर्वलिखित था। दोनों के पास राजनीति में आने के अलावा कोई और विकल्प नहीं रह गया था।

क्रेडिट: फेसबुक / कमल चंद्र भंजदेव

‘महाराजा जी’ (कमल खुद के बारे में थर्ड पर्सन की तरह बताते हुए इसी संबोधन का इस्तेमाल कर रहे थे) की इस एक घन्टे की मीटिंग में ही उन्होंने बस्तर के बारे में इतना डर प्रोजेक्ट कर दिया, जितना डर मुझे पूरे बस्तर डिवीजन में पिछले कुछ दिनों से चक्कर लगाते हुए नहीं लगा।

फिर भी ये कहना पूरी तरह से गलत होगा कि बस्तर खतरे में नहीं है। जिस तरह पहाड़ी और जंगली इलाकों में आए दिन क्रूर नक्सली हमले होते रहते हैं। हालात हाथ छोड़ते ही विकराल रूप धर सकते हैं। जिन सघन इलाकों को ड्रोन कैमरे भी नहीं भेद पाते। गरीबी और घातक भोलेपन की दीवार केवल और केवल तीन चीजें ही तोड़ सकती हैं, शिक्षा, बुनियादी विकास और रोजगार

(ये ‘प्रज्ञा की बस्तर यात्रा’ का आखिरी भाग है. पूरी सीरीज यहां पढ़ें)


ये भी पढ़ें:

बस्तर 5: बीजापुर में संस्कृति संरक्षण पर दादा लोग नरक मचा रखे हैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here