दूसरी सदी की एक तकनीक कैसे पैदा कर रही है लाखों रुपए?

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सदियों पुराना एक विज्ञान आज इक्कीसवीं सदी में हजारों लोगों के जीवनयापन का स्रोत बन चुका है। एक ऐसी टेक्नीक जो देश के पहाड़ी इलाकों से निकलकर दूरदराज के राज्यों तक फैल गई है। ‘घराट परियोजना’, जिस टेक्नीक को उत्तराखंड के लोगों ने फालतू समझ कर त्याग दिया था, घराटों का इस्तेमाल करना बंद कर दिया था, आज वही घराट ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में बसे परिवारों के लिए खुशहाली की वजह हैं। घराट को मुख्यधारा में लाने का श्रेय जाता है हेस्को को। हेस्को यानि कि हिमालयन एनवायरमेंटल स्टडीज एंड कंजरवेशन ऑर्जेनाइजेशन। ये उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से संचालित होता है।


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