कटहल से बने स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर नाम कमा रही लखनऊ की ये महिलाएं

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“एक लड़की का ठेले पर खड़े होना और खड़े होकर समान बेचने को सोचिए; हमारा समाज किस तरह सोचता और देखता है। तो मैं समझती हूं, समाज की एक कुंठित जो सोच बन गई है कि महिला कहीं बाहर जाकर काम नहीं कर सकती, कहीं ठेले पर खड़ी नहीं हो सकती, कोई अपना व्यापार नहीं लगा सकती। तो हमारा यह कटहल के व्यंजनो का ठेला लगाने का प्रयास उस पितृसत्तात्मक सोच और महिलाओं को लेकर उस आम मानसिकता पर भी एक गहरा चोट है जो हमें कमजोर या लाचार समझते हैं।“

उन्नीस वर्षीय आफरीन के इन शब्दों को पढ़ते हुए आप इस देश के उन लाखों सजग और शिक्षित बेटियों के भीतर कौंध रहे विचार को भली-भांति समझ सकते हैं जो सालों से चली आ रही उन तमाम बेड़ियों को एक झटके में उखाड़ फेंककर आगे बढ़ने का ना सिर्फ साहस ही रखती हैं बल्कि उस घिनौनी और सड़ी हुई मानसिकता के आंखों में आंखें डालकर; अपने लिए वह सम्मान भी अर्जित कर रही हैं जिसकी वह अधिकारी रही हैं।

हम बात कर रहे हैं लखनऊ के उस अनोखे और अपने आप में उत्तर भारत के एक मात्र उस सबल केंद्र (स्त्री बल) की जो सिर्फ कटहल से तैयार की गई बाईस से ज्यादा किस्म के स्वादों को आपकी थाली में परोस रहा है। चाहे वह हलवा हो या कटहल का खीर या फिर कबाब या कटहल बिरयानी से लेकर कटहल कटलेट और कटहल शेक तक!

कटहल से बने इन व्यंजनों को लेकर लखनऊ के व्यंजन प्रेमी शिवम कहते हैं, “नवाबों के इस शहर लखनऊ में अगर आपके मुंह यहां के कटहल कबाब रोल या फिर कटहल दो प्याजे का स्वाद लग जाए तो यकीन मानिए आप इस सबल केंद्र के पकवानों के फैन हुए बिना नहीं रह सकते। अपने तहजीब और लजीज स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर इस शहर के शब्दकोष को इन लड़कियों ने इतना समृद्ध कर दिया है कि अब हर शाम यह सबल केंद्र फूड शौकीनों का अड्डा बनने लगा है।“

इस केंद्र के बाहर लगी बोर्ड पर लिखी यह लाईन ‘प्राकृतिक भी और सेहतमंद भी’ आपको विश्वास दिलाता है कि स्वाद के साथ-साथ आपकी सेहत कितना जरूरी चीज है। कटहल में मौजूद फाईबर आपके पाचन क्रिया को सिर्फ बेहतर ही नहीं रखता बल्कि कब्ज और पेट के अलसर को भी दूर करता है। साथ ही इसमें पाया जाने वाला पोटेशियम आपके ह्रदय का ख्याल तो रखता ही है वहीं मैग्नेशियम आपकी हड्डियों को मजबूत बनाए रखकर बहुत सी बीमारियों को आपसे दूर रखता है।

सबल केंद्र के इस नायाब सोच और स्वाद के पीछे की सारी संरचनाओं पर बात करते हुए लक्ष्मी (संस्थापक सदस्या) कहती हैं, “हमारी संस्था रेड ब्रिगेड महीला की सुरक्षा, महिला सम्मान, आत्मरक्षा और अंदरुनी ताकत के लिए पिछले आठ साल से पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उषा विश्वकर्मा दीदी के नेतृत्व में हमने अब तक अस्सी हजार से ज्यादा बच्चियों-महिलाओं को आत्म रक्षा के लिए ना सिर्फ प्रशिक्षित ही किया है बल्कि उन्हें यह विश्वास दिलाया है कि वह कमजोर-लाचार और सिर्फ हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाने के लिए नहीं हैं। समय आने पर वह अपनी आत्म रक्षा के लिए उतनी ही सक्षम हैं जितना की कोई पुरुष।’

अपने संस्थान के लिए आर्थिक सबलता ढूंढ़ रही रेड ब्रिगेड, लखनऊ की इन लड़कियों को पुष्पेश पंत जी के कटहल के ऊपर लिखे एक आलेख ने उम्मीद की एक ऐसी रोशनी दे दी कि सभी पूरी तत्परता से इसकी सारी बारिकियां समझने में जुट गए।

अपनी इस यात्रा को लेकर समूह की ही एक साथी पूजा कहती हैं कि हमने यह पता किया कि कटहल को लेकर उत्तर भारत में ऐसा कोई केंद्र नहीं था जो सिर्फ कटहल से बने व्यंजनों को परोसता हो। काफी खोजबीन के बाद हमें कोयम्बटूर में एक ऐसे रेस्टोरेंट का पता चला और यह भी जानकारी हाथ लगी कि यह केरल का राज्य फल है और बांग्लादेश का यह राष्ट्रीय फल है।

सो हमने अब ठान ली कि यह कटहल को लेकर ही प्रयोग करेंगे और हमने सबसे पहले एक ठेला लगा दिया जो सिर्फ कटहलों का व्यंजन ही उपलब्ध करवाता है फिर बाद जब लोगों के अच्छे रिस्पांस मिलने लगे। फिर हमें जरुरत महसूस हुई कि क्यों ने एक ऐसी जगह बनाई जाए जहां महिलाओं के मुद्दे पर खाने के साथ बैठकर बातें भी की जाए। सो इस विचार ने अब एक प्यारे से सबल केंद्र का रुप ले लिया है।

जहां एक ओर अपने नायाब सोच और स्वाद की वजह से लोगों ने इनके इस प्रयोग को हाथों हाथ लिया है वहीं दूसरी ओर पनीर टिक्का और शाही पनीर से बोर हो चुके शाकाहारियों के लिए एक नया विकल्प भी तलाशकर दिया है।

लखनऊ के विश्वासखंड, गोमती नगर (रेश्म निदेशालय) में अवस्थित इस सबल केंद्र पहुंचकर आप इस लजीज व्यंजन का स्वाद तो चख ही सकते हैं और लगे हाथ रेड ब्रिगेड की इन लड़ाका लड़कियों से भी मुखातिब हो सकते हैं। जिनके कारनामे अब तक पचास से भी अधिक देशों की मीडिया ने सिर्फ प्रमुखता से छापा और सराहा है। इस रेड ब्रिगेड की मुखिया उषा को कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) ने भी बुलाया है और भारत के राष्ट्रपति महोदय के हाथों 2016 में वुमन अचीवर अवार्ड से नवाजा भी जा चुका है। तो जनाब आप कब पहुंच रहे हैं लखनऊ, कटहल से बने इन लजीज व्यंजनों को स्वाद चखने और इन लड़ाका बेटियों का हौसला बढ़ाने।


लखनऊ के इस बहुत ही सुंदर से कोने के बारे में हमें लिख भेजा है दीपक यात्री ने। दीपक एक पत्रकार और मूक अभिनय कलाकार हैं। अपने नाटकों और प्रस्तुतियों के साथ दीपक देश भर में भ्रमण करते रहते हैं। साथ ही इनको अलग-अलग जगहों के व्यंजनों और पकवानों को चखते रहने का भी खासा शौक है। क्योंकि इनका मानना है कि किसी भी जगह का खान-पान इस जगह के लिए आपकी पहचान के नए रास्ते खोलता है। दीपक फोटोग्राफी भी बढ़िया करते हैं।


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