कोशक महल: चंदेरी के बहुरंगी इतिहास का जर्जर किंतु आकर्षक हिस्सा

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पंद्रहवीं शताब्दी में मालवा के सुल्तान महमूद शाह खिलजी ने कालपी के युद्ध में सुल्तान महमूद शारकी पर फतेह हासिल की। जीत के उस जश्न में उन्होंने चंदेरी के मुख्य किले से करीब चार किलोमीटर दूर यह इमारत बनवाई, ‘कोशक महल’। ईसागढ़ की ओर जाने वाली सड़क पर खड़ी यह इमारत अब अपने असल रूप में तो नहीं बची फिर भी आकर्षक लगती है।

दूर से देखने पर लगता है जैसे कोई बहुत बड़ा दरवाजा हो और किसी राजा के महल में उसी से होकर जाना हो। कोई दुश्मन अगर देखे तो सुल्तान खिलजी की विजय पताका दूर से ही लहराती दिख जाए। एक वर्गाकार इमारत जिसे सात मंजिला बनाने का स्वप्न देखा था। उसी के हिसाब से नाम रखा था खुशक-ए-हफ्त यानि सात मंजिला भवन।

पर, कहते हैं कि वह स्वप्न कभी पूरा नहीं हुआ क्योंकि इतनी ऊंचाई तक भारी पत्थरों को ले जाने में बहुत कठिनाई हो रही थी। हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि वक्त के साथ ऊपरी मंजिलें ढह गईं। अब सिर्फ चार के ही अंश दिखते हैं। ऊपरी हिस्से जर्जर दिखते हैं जिन्हें पब्लिक के लिए बंद कर रखा है।

कहते तो यह भी हैं कि कालपी के युद्ध के बाद जनता के पास कोई काम नहीं था इसलिए रोजगार देने के लिए सुल्तान ने इस इमारत को बनाने के लिए कहा ताकि लोगों को काम मिले। कहने-सुनने में क्या रखा है। हर ऐतिहासिक इमारत के साथ कुछ किस्से जुड़े होते हैं। उस सबसे इतर इसकी भव्यता मोहक है। आप वहां से गुजरें और इसे देखने रुकें नहीं ऐसा शायद ही हो।

हम जब तक चंदेरी में रहे तब तक संडे के संडे यहां जाते थे। फिर चंदेरी छूट गया और बहुत सारी यादें रह गईं। अब जब भी उस रास्ते से गुजरना होता है दो पल के लिए यहां ठहरना जरूर होता है। इस खूबसूरत इमारत को देखने और बचपन की यादें ताजा करने। पिछले दिनों किसी सफर के दौरान यह तस्वीर याद के रूप में सहेज ली।


चंदेरी के इस कोने के बारे में हमें लिख भेजा है अंकिता जैन ने। अंकिता हिंदी भाषा की लेखिका हैं। इनकी दो किताबें ‘ऐसी वैसी औरतें’, ‘मैं से मां तक’ काफी हिट रही हैं। एक गंभीर लेखिका होने के साथ-साथ अंकिता एक बेफिक्र यायावर भी हैं। देश-विदेश में तमाम लैंडमार्क ये अपने नाम के साथ मार्क कर चुकी हैं। अंकिता अपने जीवनसाथी के साथ वैदिक वाटिका नाम की एक जैविक प्रयोगशाला भी चलाती हैं, जहां पर दोनों साथ में कृषि के तरीकों में आधुनिक किंतु पर्यावरण के लिए अनुकूल प्रयोग करते रहते हैं। 


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