लवासा सिटी: ग्लैमरस विज्ञापनों से ख्याति पाया एक बड़ा ही औसत हिल स्टेशन

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गर्मी बहुत है । बिना काम और ऑफिस के घर से निकलने का भी मन नहीं करता । लेकिन एक चीज है, जो मुझे घर पर बैठने नहीं देती, वो है मेरे पांव का तिल। इससे साफ है मुझे घूमते रहना है। वीकेंड पर 2 दिन की छुट्टी मिली तो सोचा लवासा घूम आऊं। लवासा का नाम बहुत सुना था, मेरी दिल्ली की एक दोस्त होकर आई थी और उसके मुंह से तारीफ सुन, मैंने भी प्लान बना ही लिया।

मुंबई के दादर से पुणे, लोनावला के लिए शेयरिंग टैक्सी और बसें जाती हैं। मात्र 300 रुपए में मुंबई के रास्ते लोणावला में 1 ब्रेक लेते हुए आप 3 घंटे में पुणे पहुंच सकते हैं। सो मैं पुणे पहुंच गई। अब पुणे में स्टेशन के सामने ही आपको कई टैक्सियां मिल जाएंगी, जो लवासा छोड़ देंगी। लवासा के लिए सबसे ध्यान देने वाली बात है कि यहां परिसर में पहुंचते ही 500 रुपए एंट्री फीस देनी ही होती है। भले ही आप इस बात का कितना ही हवाला क्यों न दें कि ड्राइवर ड्रॉप करके फौरन आ जाएगा। पुणे टू लवासा मात्र 1 घंटे का रास्ता है लेकिन इतना घुमावदार कि अगर आपको चक्कर या उलटी की दिक्कत है तो आप रास्ते में गाड़ी रुकवाने के लिए तैयार रहिए।

मैं भयंकर गर्मी में यहां होकर आई हूं इसलिए अनुभव बहुत खास नहीं रहा लेकिन फिर भी अगर सिर्फ फ्लैट लेकर फैमिली या दोस्तों के साथ अच्छे व्यू के साथ दिन की शुरुआत और ड्रिंक के साथ दिन का अंत करना चाहते हैं तो ये एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। घूमने के नाम पर सिर्फ दासवे लेक है जहां कुछ वॉटर एक्टिविटीज होती है। मोटर बाइक में झील का 1 चक्कर लगाने के लिए 600 रुपए देने होंगे, वहीं बोटिंग के लिए 150 रुपए पर सीट है, जिसमें लग्जरी क्रूज में 1 चक्कर घुमाया जाता है।

गर्मी थी तो ज्यादातर होटल और रेस्त्रां बंद थे, हालांकि वहां जिस फ्लैट में आप ठहरेंगे वहां डिलीवरी मिल जाएगी। यहां लग्जरी या 5 स्टार होटल नहीं है, फ्लैट कल्चर है, जहां 2 बीएचके और 3 बीएचके फ्लैट मिलेंगे, जो काफी महंगे है। इस वक्त तो सन्नाटा था हो सकता है बारिश में सड़कें गुलजार हों और माहौल हरियाली भरा। रात या शाम में आप यहां से साइकिल किराए पर ले सकते हैं जिसके लिए 100 रुपए चुकाने होंगे और आप आधे घंटे साइकिल चला सकते हैं।

मैंने जो फ्लैट लिया था, उसके ठीक सामने दासवे लेक थी, सुबह और शाम का नजारा बेहद सुंदर लगता है। पर्दे हटाते ही कोयल और चिड़ियों की चहचहाहट और ठंडी हवाएं बेहद खुशनुमा थीं। यहां कुछ एडवेंचर एक्टिविटीज भी होती है जैसे जिप लाइनिंग, आर्चेरी । अच्छी जगह है पर गर्मी में न जाने की सलाह है।


इस नए बने टूरिस्ट स्पॉट के बारे में ये तमाम बातें हमें लिख भेजी हैं शालू अवस्थी ने। शालू पत्रकार हैं। शालू बताती हैं कि अब तो हर वीकेंड निकल लेती हैं कहीं न कहीं घूमने। धुन सवार है कि जितना घूम सकें उतना घूम डालें, बस घूम डालें। स्वादिष्ट व्यंजनों में जान बसती है। फोटो खिंचवाना पसंदीदा शगल है। चाहती हैं कि इस ब्रह्मांड के सभी लोग झोला उठाकर घूमने निकल पड़ें।


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