बिना प्लान की हुई ट्रिप जितना मजा कहीं और नहीं

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मनाली। व्यास नदी घाटी में बसा हुआ एक खूबसूरत पर्वतीय नगर। हिमालय की ऊंची चोटियों की गोद में स्थित इस शहर का नाम मनाली क्यों है यह शायद बहुत कम लोग जानते हैं। प्राचीन हिन्दू विधि के निर्माता ऋषि मनु के नाम पर इस शहर का नाम है। मनुआलय का बिगड़ा स्वरूप मनाली। मेरी जानकारी में शायद ऋषि मनु का एकमात्र मंदिर है जो यहां विद्यमान है। किंवदंती के अनुसार प्रलय के बाद ऋषि की नाव जिसमें सृष्टि के बीज थे, वह यहाँ आकर लगी। मनु ने इसी स्थान से सृष्टि का पुन: प्रसार प्रारम्भ किया।

पहाड़ों से भी खूबसूरत होती हैं वहां बलखाती नदियां

इस शहर को पर्यटक गतिविधियों के अनुसार मोटे तौर पर दो भागों में बांटा जा सकता है। एक तो न्यू मनाली जो देशी पर्यटकों, नये शादीशुदा जोड़ो,और परिवार के साथ आने वाले लोगों का मुख्य आकर्षण है। न्यू मनाली स्थित माल रोड पर पर्यटकों की भीड़ चहलकदमी करती मिल जाती है। यहाँ से सभी दर्शनीय स्थलों के लिये वाहन आराम से उपलब्ध हैं। रुकने के लिये होटलों की भरमार है यहाँ। माल रोड पर हर तरह का खान पान आसानी से उपलब्ध है। शेर-ए-पंजाब रेस्त्राँ खासा लोकप्रिय है क्योंकि इसके लिये मैनें कतार लगती देखी। तेल मालिश करने वाले माल रोड का विशेष आकर्षण हैं। थोड़े से पैसों के बदले में ये पर्यटकों के पैरों में मालिश करते हैं। बुजुर्ग लोग खासतौर पर इसका आनंद उठाते हैं। न्यू मनाली में हर उम्र के लोगों की रुचि से जुड़े साधन उपलब्ध हैं।
दूसरा केन्द्र है ओल्ड मनाली। यह न्यू मनाली की भीड़-भाड़ से आपको थोड़ा दूर ले जाता है।विदेशियों और बैकपैकर्स की मनपसंद जगह है ओल्ड मनाली। यहां पर ठहरने की जगह सस्ती और खूबसूरत है। कई सारे पब जैसे लेज़ी डॉग, हैन्ग आउट आदि फूड और संगीत के लिए प्रसिद्ध है। यहां देशी विदेशी संस्कृति का संगम दिखता है। यहां पर आप सबसे बढ़िया हॉट चॉकलेट का मजा ले सकते हैं जो मनाली की सर्द शाम में स्वर्गीय अनुभव देती है।यहाँ पर आपको बहुत अच्छी बेक़रीज़ और विदेशी खानो की जगहें मिलेंगी लेकिन देशी खाना ढूंढना थोड़ा मुश्किल है। कुछ समय अपने साथ बिताने और रिलैक्स करने के लिये ओल्ड मनाली सबसे अच्छी बढ़िया जगह है। हां थोड़ी चढ़ाई पर होने के कारण यहां युवा लोग ही दिखते है या फिर स्थानीय लोग ।
इस जगह की अनूठी खूबसूरती को अगर महसूस करना हो तो भीड़-भाड़ से दूर यहां के रिहायशी इलाकों की ओर निकल पड़ें। पुरानी तर्ज पर बने लकड़ी के छोटे पर खूबसूरत घर ,पतली पगडंडियां, दूर दूर तक फैले सेबों के बगीचे और यहां के लोगों का सरल निश्छल व्यवहार मन को मोहने वाला होता है। यहां मुझे शकुंतला जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनसे बात करते हुए ऐसा नहीं लगा कि मैं उनके लिए अजनबी थी। उन्होनें अपने घर परिवार और मनाली के बारे में बताते हुए सेबों के बाग घुमाए और अपने पारंपरिक हिमाचली घर में बुला कर पुदीने की चाय भी पिलायी।पुदीने की चाय यहाँ बहुत लोकप्रिय है और सेहत के लिये फायदेमंद भी है।

पहाड़ और बादल पक्के वाले दोस्त होते हैं

वैसे तो मनाली में बहुत से दर्शनीय स्थल हैं लेकिन हिडिम्बा देवी का मंदिर यहाँ की विशेषता है। वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में देवदार के पेड़ों के बीच पगोडा शैली में लकड़ी का ये मंदिर एक अलग ही छटा बिखेरता है। महाभारत की कथाओं के अनुसार हिडिम्बा एक राक्षसी और पांडव पुत्र भीम की पत्नी थीं। कहा जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान भीम ने हडिम्ब नाम के राक्षस को मार डाला। हडिम्ब की बहन हडिम्बा ने प्रण किया था कि जो उसके भाई को हरायेगा उसी से वह विवाह करेंगी। भीम ने हडिम्बा से विवाह किया और इनका एक पुत्र घटोत्कच भी हुआ। पांडवों के जाने के बाद हडिम्बा ने अपना जीवन तपस्या में लगा दिया। इसी वजह से इन्हें देवी माना गया। जिस गुफा में इन्होनें तपस्या की थी वहीं पर यह मंदिर बना है।मेरे ज्ञान में हिडिम्बा देवी का यह एकलौता मंदिर है। स्थानीय लोगों की इन पर अटूट श्रद्धा है। देवी को प्रसन्न करने के लिए पहले यहां पशुबलि का रिवाज था लेकिन अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध लग चुका है। मंदिर की दीवारों पर मारे गये पशुओं की खोपड़ियां आज भी लगी हुई हैं। कुछ ही दूर पर महाभारत के महान योद्धा घटोत्कच का भी मंदिर है।

हिडिंबा मंदिर की इमारत में लगे सींग

मंदिर के आस पास का वातावरण मनोरम है। याक की सवारी करने के लिये और हिमाचली वेशभूषा में तस्वीरें खिंचवाने के लिए यहां पर्यटकों की भीड़ जुटी रहती है। रूई के बंडलों जैसे खरगोशों के साथ सिर्फ दस रूपये में फोटो खिंचवा सकते हैं। मैनें भी राजू नाम के खरगोश के साथ हिमाचली कपड़ों में तस्वीरें खिंचवाईं। अगर आपको मनाली के सौन्दर्य का असली आनंद लेना है तो कुछ भी योजना मत बनाइये। किसी भी तरफ निकल पड़िए। यहां पैदल रास्तो में पड़ने वाले छोटे छोटे झरने बहुत ही मन मोहने वाले होते है। यहां के लोगों से बातें कर के एहसास होता है की मासूमियत की कोई उम्र नहीं होती। अनजान लोगों से डरने जैसी चीज यहां किसी ने जैसे सीखी ही नहीं। आपको न जानते हुए भी अपनी बेटी के ससुराल तक का हालचाल तक आपसे बताने वाले लोग, अपने घर में बुला कर चाय पिलाने वाले लोग सहज ही मन को भा जाते हैं। पर्यटकों की भीड़ भाड़ वाले रास्तों से हटकर घूमने पर मनाली का अनछुआ और पवित्र सा वातावरण आपको बांध लेता है और मन का एक हिस्सा जैसे वही कहीं छूट जाता है। यह एक ऐसी जगह है जो एक बार में आपको तृप्त नहीं होने देगी।

मैं भी तृप्त नहीं हुई और मन ही मन फिर से यहां आने का वादा करके इस जगह से विदा ली।


अपनी इस अनप्लांड ट्रिप के बारे में हमें लिख भेजा है ऋचा बाजपेई ने। ऋचा एक शांत धारा हैं। इनकी मंद मुस्कान मानो आस-पास के जीवों में प्राण डाल देती है। दुनियावी झंझटों से मुक्ति पानी होती है तो झट से प्रकृति की गोद में जा बैठती हैं। महीनों पहले प्लान बनाना और फिर घूमने जाना इनको रास नहीं आता। इनकी तासीर वही वाली है कि हम तो झोला उठाकर चले।  


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