नैनीताल घूमने जा रहे हैं तो पहुंचकर इन बातों का रखें ध्यान

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अगर आप नैनीताल घूमने का प्लान कर रहे हैं तो कुछ खास बातों का ध्यान देकर आप वहां तनावमुक्त सैर का मजा ले सकते हैं। अक्सर जब हम किसी पर्यटन पर होते हैं तो हम उस जगह को जीने की फिराक में होते हैं। हम वहां उन तमाम बिम्बों को खोजने का प्रयास करते हैं जो उक्त पर्यटन का प्रतिनिधि हो, फिर चाहे वो वहां की सभ्यता हो, खान-पान हो, शिल्प हो या फिर वहां का भूगोल हो। लेकिन कभी-कभी घूमने जाने वाली जगह के प्रति हमारी असहजता वहां की मौज को फीका बना देता है। यहां मैं आपको नैनीताल के प्रति सहज बनाने की कोशिश करूंगा जिससे जब आप वहां जायें तो मस्त चित्त से सैर का लुत्फ उठा सकें। आइए जानें किन बातों का रखना है खास ख्याल

हिमालयन प्वाइंट

नैनीताल में एक खास हिमालयन प्वाइंट है। यहां से हिमालय पर्वत बेहद साफ और खूबसूरत दिखता है। अगर आप सार्वजनिक साधन से नैनीताल पहुंचे हैं तो फिर आपको गंडोला, टैक्सी आदि से हिमालयन प्वाइंट जाना पड़ेगा। लेकिन यदि आप अपने निजी साधन से हैं तो ये बात ध्यान में रखनी चाहिए कि उसके साथ ही आप हिमालयन प्वाइंट तक पहुंच सकते हैं। हालांकि ऊपर पहाड़ में छोटी-छोटी चार पहिया गाड़ियों के साथ आपको कुछ लोग मिलेंगे जो आपसे यह कहेंगे कि आपकी गाड़ी उस हिमालयन प्वाइंट तक नही जा पाएगी ताकि आप अपनी बड़ी चार पहिया गाड़ी को उनके पास छोड़कर उनकी छोटी वाली चार पहिया गाड़ी को किराये पर ले जाएं। इससे आपको बचना होगा। आप कितनी भी बड़ी चार पहिया गाड़ी साथ लेकर गए हों, वह हिमालयन प्वाइंट तक जाने में सक्षम है और गाड़ी ले जाने की आपको पूरी छूट भी है। बेहतर यही होगा कि आप अपनी ही गाड़ी से हिमालन प्वाइंट तक जाएं और सैर करें, वहां का भरपूर मजा लें। इसके लिए रास्ते में पड़े उन छोटी गाड़ियों वाले ग्रुप को नजरअंदाज कर आप आगे बढ़ें।

हिमालयन प्वॉइंट

मौलिक शिल्प

नैनीताल के मौलिक शिल्प में यहां की विशिष्ट मोमबत्तियां, चीड़ के फूलों से बनी कलाकृतियां और लकड़ी से बने किचन और कुछ घरेलू उपचार के सामान आदि प्रमुख स्थान रखते हैं। यद्यपि लकड़ी से बने कुछ सामान भी अब नैनीताल से बाहर कई जगहों पर मिल जाते हैं। फिर भी यदि आप उत्तर के प्रदेशों और दिल्ली के क्षेत्र से बाहर और समतल की जगह से हैं तो आपके लिए इन सामानों हेतु नैनीताल ही उपयुक्त है। आप यहां से इन सामानों की खरीदारी कर सकते हैं।

नैनीताल के पूर्णतः मौलिक शिल्पों में आज भी यहां की मोमबत्तियां और चीड़ के फूलों से बनी कलाकृतियां लोगों की खासा पसन्द का हिस्सा हैं। ये दोनों ही चीजें आपको नैनीताल से बाहर कहीं नहीं मिलेगी। इसलिए आप यहां से इन दोनों सामानों को खरीदकर ले जा सकता हैं। इसमें मोमबत्तियां सभी के लिए सबसे किफायती है सुलभ हैं। विशिष्टता में तो इनका कोई सानी भी नहीं है। आप किसी अपने खास नैनीताल की कोई निशानी ले जाना चाहते हैं तो इसमें यहां की इन मोमबत्तियों को पहले तरजीह दें। ये मोमबत्तियां 10 रुपये से लेकर आपकी इच्छा तक के दामों में आपको मिल जाएंगी जोकि काफी खुशबूदार और भिन्न-भिन्न डिजाइनों और आकृतियों वाली होती हैं।

चीड़ के फूलों से तैयार शिल्प

लोकल फूड

आपने ये कहावत तो जरूर ही सुनी होगी कि ‘ईट लोकल-थिंक ग्लोबल’ । जी हां, हमें आंख मूंदकर इसका अमल भी करना चाहिए। जहां भी घूमने जाएं वहां का लोकल फूड खाने से बिल्कुल न चूकें। वैश्वीकरण के कारण नैनीताल में नयना देवी मन्दिर के बगल में आजकल फास्ट-फूड वाली एक संकरी गली है। ये गली तो पहले भी थी लेकिन इस हिसाब से यहां फास्ट-फूड की गंध पहले न आती थी। आप इस गली में घुसने से बचें। इसका एक सबसे बड़ा कारण यह भी है कि जब आप नैनीताल घूमकर वापस पहाड़ उतरेंगे तो ये फास्ट-फूड आपको काफी नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसलिए वैश्वीकरण के इस रूप से आपको बचना बेहद जरूरी है। नैनीताल में लोकल फूड के नाम पर यहां की दानेदार वाली बर्फी मात्र आपको मिल सकती है। आप मिठाई की दुकान में बस यही ‘दाने वाली बर्फी’ कहकर मांग सकते हैं। नैनीताल जब आप जाएं तो यहां की इस दाने वाली बर्फी का स्वाद चखना न भूलें। इसे स्थानीय लोग बाल-मिठाई कहते हैं।

चिड़ियाघर

समुद्रतल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर 4.693 हेक्टेयर में फैला नैनीताल चिड़ियाघर बेहतर प्रबंधन की मिसाल है। ये बेहद छोटा सा चिड़ियाघर है, लेकिन अपने विशेष प्रबंधन के कारण यह बिल्कुल उपयुक्त है। जिस पहाड़ पर चिड़ियाघर है वहां से तल्लीताल और मल्लीताल के नजारे और सामने बसे शहरों की छवि के दर्शन का अलग ही आनन्द है। जब आप मॉल रोड पर चलते-चलते चिड़ियाघर के लिए जाने वाले चढ़ाईनुमा रास्ते में मुड़ रहे होंगे तो उसके मुँहाने पर ही आपको 4-5 लोग यह टोकते हुए मिलेंगे कि ऊपर 2 किलोमीटर की चढ़ाई है इसलिए यहां से किराये की चारपहिया गाड़ी की सुविधा ले लीजिए।

दिलचस्प बात यह है कि जब आप चिड़ियाघर जा रहे होंगे उससे पहले घूमकर आपको थोड़ा-थोड़ा थकी का एहसास हो चुका होगा। लिहाजा बहुत मुमकिन है कि 2 किलोमीटर की इस चढ़ाई को भांपकर आप उनकी सुविधा ले लें। एक बात और कि यदि आप उस मुहाने पर अपनी निजी गाड़ी से प्रवेश ले रहे होंगे तो आपको यह कहकर भी उन लोगों द्वारा डराया जाएगा कि ऊपर रास्ता अत्यधिक संकरा है और आपकी गाड़ी पर गहरी खरोचें आ जाएंगी।अब देखिये, यहां पर आपको सावधानी की आवश्यकती होगी। पहली बात तो उन व्यक्तियों द्वारा दी गयी ये जानकारी कि ऊपर आगे 2 किलोमीटर का लम्बा रास्ता है, बिल्कुल झूठी बात है।

शिकार की फिराक में सफेद मोर
दरअसल ये रास्ता बमुश्किल महज 400-500 मीटर का ही है, जिसे आप आसानी से नाप सकतें हैं फिर चाहे आप थके ही क्यों न हों। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप मॉल रोड से ऊपर चिड़ियाघर की दूरी को पैदल ही तय करें क्योंकि दूरी के हिसाब से इनकी गाड़ियों का किराया काफी मंहगा है। दूसरा, ऊपर रास्ता उतना संकरा भी नहीं है कि आपकी गाड़ी पर खरोच आ जाये। इसलिए बेहतर यही होगा कि आप पैदल ही चिड़ियाघर तक जायें और लम्बे समय तक वहां रहकर मौज लें।
चिड़ियाघर में सुस्ताता हिमालयन भालू
चिड़ियाघर जाते समय चूंकि चढ़ाई है इसलिए एक बात जो आप को और ध्यान में रखनी है वो है आपके फुटवियर का चुनाव। हां जी, महिलाएं इसको ध्यान से समझ लें कि आपको हाई-हील से यहां पर कम्प्रोमाइज करना ही होगा वरना आपका ये शौक वाकई आपको पड़ेगा मंहगा। इसके अलावा उच्च रक्तचाप वाले लोगों को नैनीताल चिड़ियाघर जाने से परहेज करना चाहिए। इस तरह से उक्त इन तमाम बातों का ख्याल करके आप नैनीताल में होशियार रहेंगे और बिना ठगा हुआ महसूस किये प्रकृति के आनन्द का रस बटोर पाएंगे।

नैनीताल के बारे में हमें लिख भेजा है अमित राजपूत ने। अमित राजपूत, देसी मिजाज के सख्त इंसान हैं। सख्ती से हमारा मतलब, इनका अपनी तरह के इलाहाबादी अभिजात्यपना से है। इनको इलाहाबाद से बहुत प्रेम है। इनकी फेसबुक प्रोफाइल इलाहाबाद विश्वविद्यालय की फोटुओं से भरी रहती हैं। अभी हाल ही में उत्तराखंड के कुमाऊं इलाके में पहुंचे थे। 

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