नारनौल का जलमहल: शानदार विरासतों के लिए हमारी उपेक्षा का प्रतीक

ये है नारनौल का जलमहल। कतई खूबसूरत जगह रही होगी, ऐसा उसके खंडहर चीख-चीखकर कह रहे हैं। लेकिन फूटी किस्मत हरियाणा वालों की, अपनी इतनी सुंदर विरासत न बचा पाए यहां के लोग। इस भूले, ठुकारए हुए महल/किले को 1591 में अकबर के एक अधिकारी शाह कुली खान ने बनवाया था। ऐसा वहां पर एक जंग लगे बोर्ड में लिखा है।

इतिहास प्रसिद्ध पानीपत के द्वितीय युद्ध में शाह कुली खान ने हेमू को पकड़ा था। उसकी इस उपलब्धि से खुश होकर अकबर नेकुली खान को नारनौल की जागीर सौंपी थी। जलमहल का निर्माण तकरीबन ग्यारह एकड़ के विशाल भूखण्ड पर किया गया है। मुख्य द्वार से महल तक पहुंचने के लिए पुल बना हुआ है। इस पूरी दूरी के बीच खाली जगह पर पानी भरा रहता था। इस सुन्दर भवन के निमार्ण में चूने व पत्थर का प्रयोग किया गया है।

लगभग 400 वर्ष के अन्तराल में यह तालाब मिटटी से भर गया था। साल 1993 में जिला प्रशासन ने जलमहल के तालाब से मिट्‌टी निकालने का कार्य शुरू किया था। अब इसकी मिट्‌टी तो निकाली जा चुकी है लेकिन सही रखरखाव की कमी के चलते इस महल का हाल बुरा है।इस इमारत के चारों तरफ मजबूत सीढ़ियां बनी हुई हैं। और जो ये खाली जगह दिख रही न। उसमें उस वक्त पानी भरा रहता होगा। सोचिए, आज भी उस खूबसूरती को संजोकर रखा गया होता तो इस जगह पर कितने सारे लोग घूमने आते, पिकनिक मनाते और इससे सरकार की कमाई होती। लेकिन वही घर की मुर्गी दाल बराबर। अब हरियाणा सरकार ने इसकी सुध ली है, पानी भरा जा रहा है खाली पड़े कुंड में। लेकिन स्थानीय लोगों की उपेक्षा इतिहास की इन अनुपम विरासतों के लिए हानिकारक है। 

एक बात और बताते हैं, जब हम यहां पहुंचने के लिए रास्ता ढूंढ रहे थे तो दो स्थानीय लोगों से इस जलमहल का पता पूछा। उनका चेहरा सांय-बाय करने लगा, बोले कि यहां तो ऐसा कुछ है नहीं। आप आगे चले जाइए, शायद एक दो पुरानी जगह हैं। लेकिन यहां तो कुछ भी नहीं, इधर कैसे पहुंच गए आप। ऐसा कहकर वो दोनों आगे बढ़ गए। बाद में जब हम ढूंढे और तो पता चला कि जलमहल के पास ही खड़े हैं। पहले अपने ऊपर हंसी आई, और तुरंत बाद उन लोगों पर गुस्सा।


ये भी पढ़ें:

वो लोकसंगीत, जो भारत-बांग्लादेश को आज भी एक कर सकता है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here