कहानी बादलों और सतपुड़ा के जंगलों के बीच बसे पचमढ़ी की

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जब घूमने की इच्छा और बड़े-बड़े सपने मन में नहीं थे। तब से ही मध्यप्रदेश टूरिज्म के एक एड ने दिमाग के एक छोटे से कोने में बड़ी जगह बना ली थी। जब भी मध्यप्रदेश या ऐसी किसी जगह का जिक्र होता तो सिर्फ आंखों के इशारे से बने इस सुन्दर से एड की लिरिक्स जुबान पर आ जाती है। यहां सब कुछ घूमने का मौका तो फिलहाल मिला नहीं लेकिन मध्यप्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी घूमने का मन इस बार पूरी तरह से बना लिया था।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर सतपुड़ा की पहाड़ियों की गोद में बसा छोटा-सा हिल स्टेशन बेहद खूबसूरत है। हिमाचल और उत्तराखंड की तुलना में यहां की पहाड़ियों की एक खास बात है। यहां पेड़ों की तादाद बहुत ज्यादा है और बारिश भी अच्छी-खासी होती है। मध्यप्रदेश में बारिश का मौसम कुछ इस कदर गुलजार होता है कि इनकी खूबसूरती देखते बनती है।

भोपाल से पचमढ़ी तक जाने वाली ये हमारी रोड ट्रिप थी। जिसे हमने बाइक से कवर करने का प्लान बनाया। पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तुलना में बाइक या अपनी गाड़ी से जाने की एक खास बात है। अनुभवों की फेहरिस्त में काफी कुछ नया जुड़ता है। भोपाल से होशंगाबाद और उसके बाद पचमढ़ी तक का ये सफर हमने दो हिस्सों में पूरा किया। नेशनल हाईवे की तुलना में इस रूट में अभी भी ज्यादातर सड़कें वन-वे हैं। जहां दिन में तो आसानी से गाड़ियां चलाई जा सकती हैं लेकिन रात के समय काफी मुश्किल हाती है क्योंकि गायों का एक बड़ा झुंड आपको सड़क पर कहीं भी मिल सकता है।

पचमढ़ी

होशंगाबाद से पचमढ़ी का रास्ता करीब 130 किलोमीटर का है। 70 किलोमीटर तक का रास्ता तो शानदार है लेकिन आगे का 50 किलोमीटर में नोकदार मोड़ और घुमावदार रास्ते हैं। जाते समय दिन का उजाला था और मौसम भी काफी साफ था इसलिए थकान का बिल्कुल भी पता नहीं चला। SH 22 के रास्ते हम पिपरिया पार करते हुए करीब दो बजे पचमढ़ी पहुंचे।

पहाड़ों में एक अनोखी ऊर्जा होती है जो हमें पॉजिटिविटी का अहसास कराती है। या शायद हम मैदानी इलाके वालों को पहाड़ कम देखने को नहीं मिलते शायद इस वजह से ऐसे लगता हो। कारण कुछ भी हो सकता है, खैर करीब 3-4 से घंटे के लंबे सफर के बाद आखिरकार हम पचमढ़ी पहुंच चुके थे।

जटाशंकर: शिव की उपासना

पचमढ़ी छोटे हिल स्टेशन के साथ कैंट एरिया भी था। शिव भगवान यहां के ईष्ट हैं। घूमते-घूमते कई जगहों पर शिव मंदिर आसानी से मिल जाएंगे। जिनका सैकड़ों सालों पुराना अपना इतिहास है। पचमढ़ी में घुसने के साथ ही सड़क से करीब 2 किमी. अन्दर शिव का भव्य मंदिर है, जिसे जटाशंकर के नाम से जाना जाता है।और यहीं से सफर की शुरुआत होती है। मुख्यद्वार से करीब आधा किलोमीटर अन्दर गुफाओं के बीच शिव का एक मंदिर है। कुछ साल पहले तक शायद यहां जाना मुश्किल होता होगा लेकिन फिलहाल लोहे की सीढ़ियों के रास्ते आसानी से पहुंचा जा सकता है।

सबसे नीचे वाली संकरी गुफाओं में सिर को कमर तक झुकाकर ही अंदर मंदिर तक जाने का रास्ता है। अगर आप गाड़ी से जाते हैं तो सफर आराम से तय कर सकते हैं। फैमिली और दोस्तों के साथ हैं तो ओपेन जीप आसानी से हायर कर सकते हैं। जो आपको पूरी हिल स्टेशन घुमाएगी लेकिन हम लोग तो अपनी बाइक से ही इस जगह की सड़कों को नापने वाले थे।

अगला पड़ाव- पांडव गुफा

जटाशंकर के बाद हमारा अगला स्टॉप था पांडव गुफा। पचमढ़ी में महज कुछ ही दूरी पर तकरीबन सारी घूमने की जगह है। इसलिए अगर आपके पास समय की कमी है तो आराम से सारी घूमने वाली जगह पूरी कर सकते हैं। यहां पर ट्रैफिक जैसी चीजों में आपका समय खराब नहीं होगा। हम जटाशंकर से निकलकर पूछते-पूछते पांडव गुफा के पास पहुंच गए। दूर से किसी पुरानी इमारत सी दिखने वाली जगह ही पांडव गुफा थी।

बताया जाता है कि पांडव इस इलाके से गुजरते समय इन्हीं गुफाओं में विश्राम के लिए रुके थे। पांडव गुफाओं के पास जो सबसे अच्छी देखने वाली चीज थी, वो था इसका टॉप। सबसे टॉप पर अगर आप पैनोरमा व्यू लेंगे तो आपको सचमुच पता चलेगा ये जगह कितनी खूबसूरत है। चारों तरफ सिर्फ हरियाली और ऊंचे हरे-भरे पहाड़ ही नजर आएंगे।

करीब आधे घंटे पांडव गुफा के टॉप में गुजारने एक बाद हम अपने अगले पड़ाव की ओर चल दिए। हम इस जगह के बारे में बिल्कुल अनजान थे इसलिए रास्ते में मिलने वाले लोग और दुकान वाले ही हमारे गूगल मैप, गाइड थे। इंटरनेट पर अधिक भरोसा नहीं कर सकते थे क्योंकि ऊंचाई में पहुंचने के साथ नेटवर्क आपका साथ छोड़ देता है। ये एक तरह से अच्छी ही बात है ताकि आप पहाड़ों को सिर्फ घूमकर नहीं बल्कि जी भी सकें।

( ये प्रशांत की पचमढ़ी यात्रा का पहला भाग है, अगली किश्त में पढ़ें शानदार व्यू वाले धूपगढ़ के बारे में )


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