जब पहली बार राफ्टिंग करते हुए मैं नदी में उछलकर गिर पड़ा…

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24 मार्च की रात करीब साढ़े दस बजे हम कश्मीरी गेट से हरिद्वार जाने वाली बस पर चढ़े और सुबह करीब पांच बजे हरिद्वार पहुंच गए। बस से उतरते ही हमें उम्मीद से ज्यादा ठंड का एहसास हुआ। खैर थोड़ी ही देर में सूर्योदय होना था इसलिए हम एक ऑटो में बैठे और हर की पौड़ी गंगा आरती देखने पहुंचे। यहां पहुंचने पर ठंड थोड़ी ज्यादा लगी। गंगा की तेज धारा बह रही थी। काफी लोग यहां मौजूद थे। इनमें से कुछ घाट पर स्नान कर रहे थे। हम लोग यहां पर कुछ देर इधर उधर टहले। चाय पी और कुछ तस्वीरें भी खींची।

थोड़ी देर बाद पौ फटने का नजारा दिखा और उधर अनुराधा पौडवाल के गाने के साथ गंगा आरती शुरू हुई। गंगा आरती देखने के बाद हम फ्रेश हुए और नाश्ता कर के ऋषिकेश के लिए निकल पड़े। ऋषिकेश पहुंचते ही हमने कैंपिंग और राफ्टिंग की बुकिंग कराई। राफ्टिंग पर जाने में थोड़ा वक्त था तो हमें एक जगह रुकने को कहा गया। वहां पास में ही गंगा बह रही थी तो हमने थोड़ा वक्त यहां बिताया और फोटो क्लिक कराया।

राफ्टिंग पर जाने के लिए हमारी गाड़ी और बोट दोनों आ चुकी थी। बोट को गाड़ी के ऊपर चढ़ाया गया। राफ्टिंग पर गाइड के अलावा आठ लोग जाते हैं। हम पांच लोग थे लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि एक दोस्त विक्की का वजन करीब 100 किलो था। तो गाइड ने इन्हें राफ्टिंग पर ले जाने से मना कर दिया। लेकिन बुकिंग वाले भाई साब ने दूसरे गाइड कमलेश से बात की और वह विक्की के साथ हम लोगों को राफ्टिंग पर ले जाने को तैयार हो गए। विक्की के हैवी वेट के कारण राफ्टिंग पर आठ की जगह सात लोगों का जाना तय हुआ। हम पांच के अलावा दो और बंदे दिल्ली से ही आए थे।

हम सब गाड़ी में बैठकर 18 किलोमीटर दूर शिवालिक के लिए निकल पड़े। शिवालिक से हमें राफ्टिंग शुरू करनी थी। पहाड़ के किनारे बनी हुई सड़क पर ड्राइवर रफ ड्राइविंग कर रहा था। दरअसल रास्ता ही घुमावदार था और गाड़ी तेज चल रही थी इसलिए हमें थोड़ा डर लग रहा था कि राफ्टिंग से पहले हम कहीं और न पहुंच जाएं। रास्ते में कई जगह कंस्ट्रक्शन वर्क भी चल रहा था और सामने से गाड़ियां भी स्पीड में आ रही थीं।

शिवालिक पहुंचने पर हमें लाइफ जैकेट, हेलमेट पहनाया गया और पैडल दिया गया। गाड़ी के ऊपर से बोट नीचे उतारी गई और हम राफ्टिंग के लिए सड़क से नीचे उतर कर नदी की तरफ बढ़े। राफ्टिंग से पहले हमें गाइड ने कई इंस्ट्रक्शन दिए। उसने बताया कि पैडल कैसे चलाना है, बोट पर कैसे बैठना है, पैरों को कैसे लॉक करना है, रैपिड (तेज लहर) आने पर क्या करना है, बोट से कोई गिर जाए तो क्या करना है और अगर पूरी बोट ही पलट जाए तो क्या करना है।

खैर इतने सारे इंस्ट्रक्शन सुनने के बाद हम बोट पर सवार हुए और गंगा मैया के जयकारे के साथ राफ्टिंग शुरू हुई। बोट पर विक्की को आगे बैठाया गया था। तीन लोगों को दाएं और बाकी के तीन लोग बाएं बैठे थे। गाइड कमलेश बोट पर पीछे बैठे थे। गाइड के कमांड पर हम छह लोगों को पैडल चलाना और रोकना था जबकि विक्की को रैपिड आने पर बोट के आगे झुकना था।

राफ्टिंग के एडवेंचर को यादगार बनाने के लिए हमने इसकी रिकॉडिंग भी करवाई। खैर पहला छोटा रैपिड हमने आसानी से क्रॉस कर लिया था। लेकिन आगे के रैपिड खतरनाक थे। अगले रैपिड के आने के पहले गाइड ने इंस्ट्रक्शन फिर से दोहराए और आगे की बोट की ओर इशारा करते हुए कहा- देखो उस बोट से दो बंदे नीचे गिर गए। आपलोग अपने पैर ठीक से लॉक कर के रखना वरना आप भी गिरोगे।

तेज धार के बीच फंसा मैं, मुझे बचाने के लिए तेजी बोट चलाते साथी

और अगला रैपिड हमारे सामने था। हम सब पैडल चला रहे थे। तभी बोट उछली और मैं नदी में गिर गया। लहरों ने मुझे बोट से काफी दूर कर दिया था। तैरना तो आता नहीं मुझे। खैर इंस्ट्रक्शन देते वक्त गाइड ने कहा था कि रैपिड में अगर गिर जाएं तो तैरने की कोशिश न करें क्योंकि इसमें आप के कंधे उखड़ जाएंगे। गिरने के बाद ही मेरे अंदर काफी पानी जा चुका था। मैं हाथ बढ़ा रहा था कि कोई मुझे पकड़ ले लेकिन मैं बोट से काफी दूर था। फिर गाइड का दिया इंस्ट्रक्शन याद आया कि नदी में गिरा शख्स और बोट पर बैठा कोई एक व्यक्ति पैडल आगे बढ़ाए तो बचा जा सकता है। मैंने पैडल आगे देने की कोशिश की लेकिन लहरें इतनी तेज थीं कि पैडल आगे की तरफ हो ही नहीं पाई। तभी लहरों ने मुझे लेफ्ट से राइट की ओर कर दिया और फिर गाइड ने बोट पर से किसी को पैडल बढ़ाने को कहा।

राफ्टिंग के वक्त खुद को मजबूती से चिपकाकर रखें, गाइड के निर्देशों का दिमाग खोलकर पालन करें.

दोस्त अमन ने आगे झुककर पैडल बढ़ाया लेकिन पहली बार मेरा हाथ पैडल तक नहीं पहुंच पाया। इसके बाद पता नहीं बोट थोड़ा आगे आई या फिर लहरों ने मुझे थोड़ा बोट के करीब लाया लेकिन इस बार पैडल मेरे पकड़ में आ गया और फिर पैडल को पकड़कर मैं आगे बढ़ा फिर अमन और एक दूसरे साथी ने मुझे पकड़ कर खींचा और बोट पर चढ़ाया। बोट पर आने के बाद मैं उठ कर बैठा लेकिन मेरे सिर में तेज दर्द हो रहा था। शायद पानी अंदर जाने की वजह से।

खैर इतना वक्त नहीं था मेरे पास क्योंकि अगला रैपिड आने वाला था। मैंने पैडल उठाया और राफ्टिंग करने में जुट गया। 18 किलोमीटर की राफ्टिंग में हमने कुल 10 रैपिड क्रॉस किए। राफ्टिंग के दौरान जहां नदी शांत थी वहां हम बोट से उतर कर नहाए। साफ और ठंडे पानी में हमने खूब मस्ती की और गाइड ने इन पलों को कैमरे में कैद किया।

राफ्टिंग के दौरान दूसरे बोट से हम मुकाबला भी करते थे। कभी वो आगे तो कभी हम। दूसरे बोट वाले जब बगल से क्रॉस कर रहे होते तो वो सब और हम सब पैडल से एक दूसरे को पानी पड़ाते। कुछ बोट पर विदेशी टूरिस्ट भी थे तो कुछ पर विदेशी राफ्टिंग गाइड भी। खैर अंतिम दो रैपिड के पहले हम थक चुके थे। किसी तरह हम राफ्टिंग के एंडिंग पॉइंट पर पहुंचे और यहां पर मुझे वॉमिटिंग हुई जिसके बाद मेरा सिर दर्द काफी हद तक कम हुआ।

राफ्टिंग के दौरान मैं गिरा। इसका डर मुझे नहीं था। जबकि बाकी लोग कह रहे थे कि मैं पैनिक हो गया था। हालांकि मुझे ऐसा नहीं लगता कि मैं पैनिक हुआ था लेकिन सिर दर्द ने काफी परेशान किया।


अपने इस खतरनाक और रोमांचक अनुभव को हमें लिख भेजा है रोहित ने। रोहित पत्रकार हैं। फोटो खींचने और खिंचवाने, दोनों का ही बड़ा शौक है। पहाड़ों से खासा प्यार है। लेकिन इसका ये मतलब इनकी घुमक्कड़ी वहीं तक सीमित है। जब भी जिधर भी जाने का मौका मिलता है, बैग पैक करके निकल लेते हैं। राजनीतिक मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं। आम जनता की दिक्कतों और सरोकारों के लिए कुछ सार्थक कर जाने के लिए तत्पर रहते हैं।


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