तीर्थन: हिमाचल की वो खूबसूरत घाटी, जहां कुल जमा 8 लोग मिले

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हिमाचल प्रदेश। जिला कुल्लू। कुल्लू और किन्नौर जिले के बॉर्डर के पास। घाटी का नाम तीर्थन। तीर्थन वैली को हिमाचल की सबसे सुंदर घाटियों में से गिना जाता है। हम दस लोग हिमाचल की ट्रिप खत्म करके मणिकरण से दिल्ली लौटने की सोच रहे थे। तीर्थन को लेकर हां-ना, ना-हां का खेल जारी था। फिर हुई वोटिंग और 10 के 10 लोगों ने जाने की हामी भरी। मणिकरण से भुंतर तक बस से आए और फिर भुंतर से तीर्थन टैक्सी से।

जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ रहा था रोड और खराब होता जा रहा था। रास्ते के समांतर एक ओर नदी और दूसरी ओर पहाड़। एक ओर से सोंधी सी खुशबू और दूसरी ओर से जंगली पौधों के सुगंध। रात के 9:15 बजे करीब हम तीर्थन घाटी पहुंचे। मैं चांदनी रोशनी में तीर्थन को पूरा सहेज-समेट लेना चाह रहा था। घाटी में होटल नहीं के बराबर थे, रिसॉर्ट थे। पता किया तो कहा कि जगह नहीं है। दूसरी जगह पता किया तो उसने भी मना कर दिया। मैंने कहा, अब इत्ती रात कहां जाऊंगा भैया, कुछ जुगाड़ कर दो। भाई ने पूछा सिर्फ लड़के-लड़के हो? मैंने कहा नहीं, लडकियां भी साथ हैं। फिर उसने बात मानी और एक रिसॉर्ट में रुकने की जगह मिली। जगह इसलिए नहीं मिल रही थी क्योंकि उन्हें लगा हम सिर्फ लड़के हैं और पीने-खाने वाले है। खैर, फ्रेश होकर हमने खाना खाया।

नदी के किनारे रिसॉर्ट, नदी के दूसरी ओर पहाड़ और रिसॉर्ट के दूसरी ओर रोड और फिर पहाड़। खाने के बाद हम नदी के बीच तक पुलिया तक पहुंचे जो बैठने-बतियाने के लिए ही बनाई गई थी। किस्सा-कहानी-गाते-बतियाते रात के 1 बज चुके थे। हम सभी 3 दिनों से घूम रहे थे। बुरी तरह से थके हुए थे इसलिए न चाहते हुए भी सोने जाना पड़ा क्योंकि सुबह जल्दी उठकर घाटी घूमना था और शाम तक घाटी छोड़ देना था।

दोस्त ने सुबह 5 बजे उठाया और फिर हम 5 लोग तीर्थन घाटी घूमने निकले क्योंकि बाद बाकी की उठने की हालत में नहीं थे। मैंने जितना पढ़ा-सुना-सोचा था, तीर्थन घाटी उस सब से कहीं खूबसूरत दिखी। हमने घाटी से गुशैणी तक करीब 2.5 किलोमीटर घाटी को बस निहारते रहे। गुशैणी तक जाने और आने में हमने करीब 3 घंटे लगाए।

मैं दरभंगा से हूं और हमारे यहां आम-लीची-अमरुद से लेकर कई तरह के फल होते हैं पर मैंने कभी पेड़ से तोड़कर सेब नहीं खाए थे। ये सपना मेरा तीर्थन में पूरा हुआ। 17 घंटे घाटी में रहने के दौरान मुझे कुल जमा 8 लोग दिखे, जिसमें एक गुजराती परिवार भी छुट्टियां मनाने आई थी।

वक्त की कमी थी इसलिए ट्रेकिंग नहीं कर सके लेकिन खुद से वादा है कि अगली बार तीर्थन आऊंगा तो कम से कम 5 दिनों के लिए और ट्रेकिंग भी करूंगा। गुशैणी-रोला, गुशैणी-स्लिट हट, गुशैणी-सैंजी, तीर्थन-तीरथ, जीवा नाला-पार्वती घाटी कुछ प्रमुख ट्रेक हैं जो एक दिन से लेकर 8 दिन तक के बीच हैं।

क्या है खास:

यदि आपको लगता है कि हरिद्वार, ऋषिकेश और शिवपुरी में नहाना से बहुत ठंड लगती है तो आपको घाटी में आकर तीर्थन नदी में जरुर नहाना चाहिए। माथा सुन्न न हो जाए तो कहना! ट्राउट फिशिंग के लिए, भीड़भाड़ से दूर सुकून के कुछ वक्त गुजारने के लिए। हिमालयन नेशनल पार्क जहां आपको विलुप्त हो चुके कस्तूरी मृग दिख जाएंगे। पैदल या तैरकर नदी को पार करने के लिए। दिल्ली वाले सांस लेने के लिए भी यहां आ सकते हैं। ट्रेकिंग के लिए और एडवेंचर के लिए।

कैसे पहुंचे तीर्थन घाटी:

एयर: सबसे नजदीक भुंतर एयरपोर्ट है जो कुल्लू-मनाली के लिए संयुक्त एयरपोर्ट है। यहां से तीर्थन घाटी करीब 50 किलोमीटर है। जैसे-जैसे आप घाटी के नजदीक पहुंचते हैं रास्ता खतरनाक होता जाता है।

रेल: सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन कालका स्टेशन है जहां से तीर्थन घाटी करीब 235 किलोमीटर है। इसके अलावा अंबाला और चंडीगढ़ से भी तीर्थन के लिए जाया जा सकता है।

बस: शिमला से तीर्थन के लिए नियमित अंतराल पर बसें चलती हैं।

कब जाएं:

जब दिल करें तब जाएं, ज्यादा एडवेंचर करना हो तो मानसून के मौसम और दिसंबर-जनवरी के सर्दियों में, वैसे तीर्थन आपको कभी निराश नहीं करेगा, जब जाएंगे तीर्थन में वहां के लोग आपके स्वागत के लिए तैयार मिलेंगे।


हिमाचल प्रदेश की इस कमदेखी-कमजानी जगह के बारे में हमें लिख भेजा है आदित्य झा ने। आदित्य झा पत्रकार हैं। बिहार से हैं। मैथिली भाषा में एक वेबसाइट भी चलाते हैं। सेंस ऑफ ह्यूमर बड़ा खराब है, खुद ही जोक मारकर खुद ही हंस लेते हैं। इंसान बड़े प्यारे हैं, महत्तवपूर्ण सुझाव देते हैं, जरूरत पड़ने पर साथ खड़े रहते हैं। 


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1 COMMENT

  1. अच्छा लिखा है । तीर्थन में सचमुच समय अच्छा बीतता है । बस आप कच्चे सेब खाकर अपना पेट खराब ना कर लें । जहां तक मेरा अनुमान है पुलिया वाला रिजॉर्ट त्रिशला रहा होगा । जहां पुलिया एक चट्टान तक जाती है । इस घाटी के विपरीत दिशा में बंजार घाटी की ओर अन्य दर्शनीय स्थल , शोझा , जिभी , खनाग , जलोड़ी पास , सरयोलसर झील भी हैं । वहां बंजार मेन स्टेशन से कुछ दूर चैहनी फोर्ट अपने आप मे हिमालय की पैगोडा शैली में निर्मित एक अद्भुत नमूना है । इन सभी स्थानों को एक ही दिन में कवर किया जा सकता है । बशर्ते आपको किसी कारण वश समय सीमा में बंधे रहना अच्छा लगता हो ।
    खनाग में एक रेस्ट हाउस है , जहां ब्रिटिश लेखिका और यात्री पिनेलोप चेटवुड की याद में स्मारक बनाया गया है ।

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