भारत की ‘डायमंड सिटी’ सूरत: क्या कुछ खास है यहां घूमने को

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मैं सूरत घूमने नहीं गया था। ऑफिस से चार दिन की छुट्टी लेकर अपने व्यक्तिगत काम से गया था। दिल्ली से ट्रेन से आने-जाने में ही दो दिन निकल गए। अब थे मेरे पास सिर्फ दो दिन। काम महज कुछ ही घंटों में निपट गया तो बाकी बचे समय में मैं शहर घूमने निकल पड़ा। सूरत दो चीजों के लिए प्रसिद्ध है, हीरा और कपड़ा कारोबार। हीरा तो कहीं आपको दिखेगा नहीं और कपड़ा जिधर नजर घुमाएंगे उधर ही दिखाई देगा। इन दो चीजों के इतर भी कई चीजें हैं तो सूरत को खास बनाती हैं। अगर आप कभी सूरत जाएं तो इन जगहों पर जाना न भूलें।

डुमास बीच

सूरत शहर समंदर किनारे बसा है इतना तो आप जानते ही होंगे। शहर के नजदीक दो बीच हैं जिनमें से डुमास सबसे पास है। अरब सागर का पानी, सूरत की मिट्टी को इसी जगह पर आकर छूता है। समंदर का नजारा लेना चाहते हैं तो आपको सूर्यास्त से थोड़ा पहले जाना चाहिए। अगर आपने अभी तक ऊंट की सवारी का मजा नहीं लिया है तो अपना यह शौक आप यहां पूरा कर सकते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक मोटर बाइक्स पर सवारी का विकल्प भी उपलब्ध है। खाने के लिहाज से मैगी, कोल्ड ड्रिंक, चिप्स, मूंगफली, शकरकंद जैसी अनेक सुविधाएं मौजूद हैं। आपको यहां मिलने वाली उबली मकई का आनंद जरूर लेना चाहिए। समंदर का किनारा देखते ही अगर आपको बीयर की याद आती है तो आपको थोड़ा-सा समझौता करना पड़ेगा। क्योंकि गुजरात में शराब बंद है।

बीयर की कमी को पूरा करती है हर दुकान पर बिकने वाली नॉन-एल्कोहोलिक फ्रूट बीयर। अगर आप बीयर के लिए गैर-कानूनी मार्ग अपनाने में नहीं हिचकते हैं तो आपको बीयर भी मिल जाएगी। फ्रूट बीयर बेचने वाले किसी भी दुकानदार से अपनी इच्छा जाहिर करिए, वह आपको सीधे अपने दुकान के अन्दर सजी महफिल में ले जाएगा।

कैसे पहुंचें

डुमास सूरत रेलवे स्टेशन से महज 22 किलोमीटर दूर है। यहां तक पहुंचने का हम आपको सबसे सस्ता और टिकाऊ रास्ता बताते हैं। शहर में एक जगह है अठवा दरवाजा। दरवाजे के नाम पर यहां कुछ नहीं है। असल में ये एक चौराहा है। यहां से आप एयरपोर्ट की तरफ जाने वाली किसी भी नीली सिटीलिंक बस में बैठ जाइए। वो सीधे आपको डुमास ले जाकर उतारेगी।

अठवा से डुमास के बीच किराए के नाम पर आपके सिर्फ 15 रुपए खर्च होंगे। अठवा दरवाजा के लिए शहर के हर हिस्से से आपको बस और ऑटो मिल जाएगा। यह बस आपको जिस जगह उतारेगी वहां से आपको कोई 1 किमी पैदल चलकर बीच तक जाना होगा। रात को डुमास से शहर के लिए अंतिम बस 8 बजे निकलती है।

 

सूरत कैसल

शहर के चौक बाजार में स्थित एक किलेनुमी इमारत ‘सूरत कैसल’ है। सन 1554 में अहमदाबाद के राजा सुल्तान महमूद तृतीय ने इसका निर्माण पुर्तगाली आक्रमण को रोकने के लिए किया था। बाद में इमारत अलग-अलग शासकों के अधीन हुई और इसका विस्तार होता गया। 2015 तक इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था और यह खंडहर होती जा रही थी। इसी साल सूरत महानगरपालिका ने इसका जीर्णोद्धार कार्य शुरू करवाया है जो अभी भी चल ही रहा है।

सूरत कैसल में रखा नवाब अफजलूद्दीन का सिंहासन

ऐतिहासिक रूप से ये इमारत अत्यंत महत्वपूर्ण है। अगर आपको इतिहास में थोड़ी-सी भी रूचि है तो आपको यहां जरूर आना चाहिए। इस किले में न सिर्फ भारत के समुद्री व्यापारिक इतिहास को समझाया गया है। बल्कि सोलहवीं सदी से लेकर ब्रिटिश काल तक आयात-निर्यात होने वालीं कुछ वस्तुओं को भी सहेजकर रखा गया है।
शुक्रवार, शनिवार और रविवार को यह सुबह 10 से 6 बजे तक खुला रहता है। बाकी के दिनों में 10 से 3 बजे तक खुला रहता है। अंदर जाने के लिए आपको टिकट लेनी पड़ती है जिसका दाम है 40 रुपए। अगर आप अन्दर फोटो लेना चाहते हैं तो आपको 20 रुपए का अलग टिकट लेना पड़ेगा।

डच सीमेट्री और गार्डेन

शहर में ही स्थित डच सीमेट्री भी देखा जा सकता है। गूगल आपको डच गार्डन घूमने की भी सलाह देगा। दिल्ली में बिकने वाला इन्दौरी पोहा जितना इन्दौरी है। उतना ही डच है यह गार्डन। इसकी खासियत बस इतनी सी है कि यह तापी नदी के ठीक किनारे बना हुआ है। अगर आपके पास समय है तो यहां जाइए और नदी की तरफ मुंह करके किसी बेंच पर बैठ जाइए। थोड़ा सुकून महसूस कीजिए।

डच गार्डेन से तापी नदी का नजारा

कुछ और जगहें

यहां से पास में ही दो और अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक जगहें हैं। बारदोली, जहां सरदार पटेल ने सत्याग्रह किया था और दांडी बीच। जहां गांधीजी ने नमक सत्यग्रह किया था। बारदोली शहर से 32 किमी की दूरी पर स्थित है। वहीं दांडी शहर से 52 किमी. दूर है। दोनों जगहों के लिए आपको आसानी से पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधन मिल जाएंगे।


सूरत की इस घुमक्कड़ी के बारे में हमें लिख भेजा है शुभम प्रमिल ने। शुभम पेशे से पत्रकार हैं। शुभम का दिल्ली में अपना ठिकाना है। अपने बारे में शुभम बताते हैं कि घूमना-फिरना, पढ़ना और नए लोगों से मिलना पसंद है। दुनिया देखना चाहता हूं। खासकर ऐतिहासिक जगहों को। खाने-पीने और उनकी तस्वीरें उतारने का भी खासा शौक है।


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