खीरगंगा का दुर्गम और रोमांचक सफर

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सुरेश ढौडियाल पत्रकार हैं। फुल पहाड़ी मिजाज वाले हैं। उत्तराखंड की आंचलिक समस्याओं पर लगतार काम कर रहे हैं। अभी तक खुद को फैंसी लेखन से दूर रखा है। जितने सरल इंसान हैं, उतना ही सरल लिखना भी पसंद हैं। घूमने का इन्हें बहुत शौक है। ये तो बस पापी नौकरी है जिसने इन्हें शहर में रोक रखा है, वरना इनका बस चले तो पहाड़ों पर ही रहें। जब भी इन्हें मौका मिलता है तो बस बैग पैक कर चल देते हैं पहाड़ों की ओर।


शहरी आपाधापी से दूर जब भी घूमने या सैरसपाटे के लिए प्रकृति की गोद मे जाने की बात आती है तो हिमाचल से अच्छी जगह और कोई नहीं। यहां की हसीं वादियां बांहें खोल कर आप का स्वागत करती है। हिमालय की दिलकश, बर्फ से ढकी चोटियों, चारों ओर हरे भरे खेत, हरियाली और पहाड़ों की नैसर्गिक सुंदरता सब को अपनी ओर आकर्षित करती है। हिमाचल प्रदेश को अगर घुमक्कड़ी का मक्का मदीना कहा जाये तो ये बिल्कुल गलत नहीं होगा।

‘हिमाचल’ प्रदेश का शाब्दिक अर्थ बर्फीले पहाड़ों का अंचल। यूं तो हिमाचल में कई पर्यटन स्थल है और सभी वर्ष भर पर्यटकों से गुलजार रहते है लेकिन खीरगंगा ट्रैक की बात अपने आप मे निराली है। खीरगंगा ट्रैक, कुल्लू जिले के भुंतर से उत्तर पश्चिम में पार्वती घाटी में है। खीरगंगा ट्रैक समुद्रतल से 13,051 फीट ऊंचाई पर है।

क्यों है इसका नाम खीरगंगा

खीरगंगा अर्थात खीर सी सफेद गंगा। यह पार्वती घाटी के ऊपर स्थित एक छोटा सा मैदान है। जो गर्म पानी के कुंड के लिए प्रसिद्ध है। सोलो ट्रेवेलर्स के लिये पार्वती घाटी असंख्य विकल्प प्रस्तुत करती है। चाहे वो कसोल के चिलम के नशे में चूर हिप्पी हो या मनिकरण आए श्रद्धालु, पार्वती की धाराएं सबको लुभा जाती है। पार्वती नदी अपने उफान पर खीर जैसी सफेद लगती है। चलती, उमड़ती ये नदी जब तक कसोल पहुंचती है तब तक तो इसका प्रवाह काफी धीमा हो चुका होता है।

बर्शेणी- सफर की शुरुआत का पॉइंट

कब और कैसे जाएं खीरगंगा

खीरगंगा ट्रैकिंग पर जाने का सबसे अच्छा समय  मध्य अप्रैल से सितंबर के अंत के बीच है। दिल्ली से खीरगंगा  के बीच की दूरी 570-575 किमी है। दिल्ली से कुल्लू  तक के लिए बस मिलती है जिसकी दूरी लगभग 500 किमी है।  कुल्लू के बाद  से भुंतर और कसोल तक जाने के लिए प्राइवेट बस और जीप आसानी से मिल जाती है। खीरगंगा की निकटतम शहर बर्शेणी है। भुंतर से यहां बस से पहुंचा जाता है। इसके बीच में कसोल और मणिकर्ण पड़ते है। ज्यादातर पर्यटक कसोल और मणिकर्ण तक ही घूमकर आते हैं। मणिकर्ण से खीरगंगा 25 किलोमीटर दूर है। 15 किलोमीटर दूर पुलगा तक तो बस सेवा है।

खीरगंगा के गांव

इसके पास तोश, बर्शेणी  गांव है। यहां न कसोल जैसी गंदगी है और न ही वैसी भीड़। खीरगंगा की ट्रैकिंग बर्शेणी से शुरू होती है। आगे शेष 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। पुलगा से तीन-साढे तीन किलोमीटर आगे नकथान गांव है। जो पार्वती घाटी का आखिरी गांव है। यहां पर लोगों के लिए भोजन, नाश्ता खाने की व्यवस्था होती है। यहां लकड़ी के स्टालों में ग्रामीण नूडल्स, बिस्कुट और चाय बेच कर अपना जीवनयापन करते हैं।

दुर्गम चढ़ाई

इसके आगे इस घाटी में कोई मानव बस्ती नहीं है। यहां से आगे ज्यादा चढ़ाई नहीं है। कुछ दूर ही रुद्रनाग है। यहां टेढ़ी-मेढ़ी चट्टानों से होकर झरने नीचे आते हैं। यह जगह बड़ी ही मनमोहक है और स्थानीय लोगों के लिये यह बेहद श्रद्धा की जगह है। स्थानीय लोगों का मानना है कि देवता भी यहां दर्शन करने को आते हैं। इसका संबंध शेषनाग से जोड़ा जाता है। यहां काफी बड़ा घास का मैदान भी है। गंगा की तरह पार्वती नदी भी कई धाराओं के साथ मिल कर बनती है। हर धारा जब पार्वती से मिलती है तो ऐसा लगता है जैसे वो उसके उफान को और जीवन दे रही है। पार्वती नदी पर शानदार झरना भी है। रुद्रनाग के बाद पार्वती नदी को पार किया जाता है।

इसके बाद शुरू होता है जंगल और नदी पार करने वाला रास्ता। जिसे पार करते ही चढ़ाई शुरू हो जाती है। जो कम से कम चार किलोमीटर दूर खीरगंगा तक जारी रहती है। इस जंगल में जंगली जनवरों का डर भी बना रहता है। छोटी और टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों से ऊपर पहुंचने पर घाटी की सुंदरता देखते ही बनती है। जो नजारा आंखों के सामने दिखता है उससे सफर की सारी थकान छू हो जाती है। यहां रात रुकने के लिए छोटे छोटे टेंट होते है जो कि यहां के लोगों के रोजगार का एक बड़ा जरिया है। यहां जाते हुए आप कसोल ओर मणिकर्ण भी जा सकते हैं। खीरगंगा की ट्रैकिंग जितनी दुर्गम है उतना ही आसान इस ट्रैक पर नीचे उतारना है तीन घंटे से भी कम समय में नीचे पहुंच जाते हैं।

पार्वती मंदिर

विदेशियों के बीच बहुत प्रचलित है खीरगंगा

खीरगंगा ट्रैक पर आपको कई इजराइली पर्यटक मिल जाएंगे। यहां इनकी आने की संख्या का पता यहां के रेस्टोरेंट मेन्यू कार्ड से ही चल जाता है। जिसमे बहुतायत मात्रा में इजराइली डिश अंकित होती है। ट्रैकिंग की थकान के बाद ऊपर पहुंचने पर गर्म पानी का कुंड है जो कि यहां की कड़कड़ाती ठंड में राहत का एहसास देती है। कुंड के पास है पार्वती जी का मंदिर। इससे कुछ ही दूरी पर है कार्तिके की गुफा। जिस पर यहां के लोगों की अटूट आस्था है।

क्यों जाएं और किन बातों का रखे ध्यान

इस ट्रैक पर प्रति व्यक्ति को कम से कम एक लीटर पानी ले जाने की सलाह दी जाती है। बैकपैकर खीरगंगा जरूर जाएं क्योंकि यह कैम्पिंग के लिए बहुत ही शानदार जगह है। सात जंगलो और नदियों के धारा प्रवाह के बीच टेंट लगाने का आनंद एक घुमक्कड़ ही समझ सकता है। वास्तव में खीरगंगा एक ही स्थान पर सुंदरता, शांति और एक गर्म स्नान के साथ नई स्फूर्ति भरने वाली जगह है।


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