आत्मा खुश हो जाए, ऐसा है ये शहर: उदयपुर

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वैसे तो आप किसी भी मौसम में मेरे इस छोटे से लेकिन बेहद खूबसूरत शहर उदयपुर को देखने आ सकते हैं। यहां हमेशा आपका स्वागत है; लेकिन अगर आप इसकी खूबसूरती को अपने साथ ले जाना चाहें तो आइए बरसात के बाद यानी अगस्त से जनवरी तक। बारिश के दिलकश मौसम में उदयपुर की खूबसूरत वादियों, उमड़ते-घुमड़ते बादलों, चहकते पंछियों, महकते फूलों और बांहें फैलाए खिलखिलाते पहाड़ों को आप ताउम्र भुला नहीं पाएंगे।

झीलों की नगरी कहलाने वाले इस शहर में सबसे ज्यादा फतहसागर झील और सहेलियों की बाड़ी का जलवा रहता है। लोग रोज यहां जमे रहते हैं हर शाम से देर रात तक; फिर भी उनका मन नहीं भरता। पिछौला झील में बोटिंग करिए या रोपवे से ऊपर जाकर करनी माता मंदिर, मस्जिद और किले भ्रमण के साथ राजस्थानी पारंपरिक पोशाकों में अपनी यादगार तस्वीर उतरवाइए।

आप जब ऐसे किसी वर्षा के मौसम में आएं हों तो चढ़ जाइए अपनी गाड़ी से ही सज्जनगढ़ किले पर जिसे मॉनसून पैलेस भी कहते हैं; क्योंकि ये इस रुत में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र जो होता है एक बार तो आपको लगेगा कि जन्नत अगर कहीं है तो बस कश्मीर के बाद यहीं है, यहीं है, यहीं है। आप यकीनन गाते नजर आएंगे वहां, ‘आज मैं ऊपर आसमां नीचे..’। उतरते हुए नीचे सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क भी देखिये जो उतना ही खूबसूरत है जितने उसमें घूमते फिरते मस्ती करते जानवर।

आप चाहें तो शाम को निकल लीजिए गणगौर घाट, अमराई घाट किनारे जहां आप को शर्बतों के रंग और मीठे घाट के पानी सा स्वाद जरूर आयेगा। युवाओं की टोली गाती बजाती लहरों के संग मधुर धुन छेड़ती नजर आएगी, जिसे सुनकर आपका मन कभी नहीं भरेगा। लोक नृत्यों, लोक संगीत, लोक वाद्य का शौक पूरा करने खूबसूरत राजसी शहर में शुद्ध देसी गांव देखने आइए शिल्पग्राम, लोक कला मंडल और बागौर की हवेली की ओर। आप वहां खो ना जाएं तो कहियेगा।

अलसुबह जब मोर बोलने लगें तो नींद का मोह त्यागकर जब आप बड़ी लेक आ पहुंचेंगे तभी जान पाएंगे कि बनारस की सुबह से खूबसूरत ये सुबह है। मन तो नहीं करेगा वहां से निकलने को लेकिन निकलिए और चढ़ जाइए पैदल ही सीढियां गिनते-गिनते नीमच माता की ओर, कसम से आप वहां पहुंचकर सारी थकान ना भूल जाएं तो कहना, दिल कहे रुक जा रे रुक जा यहीं पर कहीं, जो बात इस जगह है वो कहीं पर नहीं। उतरते हुए भी आनंद आयेगा मस्ती भरे रस्ते से। जब भी समय हो बागों की खूबसूरती निहारें या झील को। थोड़ा फ़ुरसत से आएं ताकि आसपास नाथद्वारा, रणकपुर, हल्दीघाटी, कुम्भलगढ़, चित्तौड़गढ़ का किला भी निहार आएं। इतने पास आकर ये ना देखा तो क्या देखा।

उदयपुर झीलों की नगरी कहलाता है,इन झीलों में अप्रवासी पक्षी भी खूब आते है तो घने जंगल होने से भालू, जरख और तेंदुए भी दिखायी देते हैं। यहां आकर प्राकृतिक खूबसूरती के साथ साथ इतिहास, संस्कृति, बोली, पहनावे और खानपान का भी पूरा पूरा लुत्फ लें। नटराज की शुद्ध सात्विक थाली ,संकल्प के दक्षिण भारतीय व्यंजन से लेकर,सुखाड़िया सर्किल, फतहसागर बम्बइया बाजार की चाट,पकौड़े, फालूदा, दाबेली और अपने मनपसंद भोजन का मजा जरूर लें। यहां ना सिर्फ सुंदरता शहर में दिखेगी; बल्कि लोगों में भी आपको सौहार्द, मेलजोल प्रेम और भाईचारे की मिसाल नज़र आएगी। झील के पानी सा शांत स्वभाव लोगों का भी और इस नन्हे से शहर का भी है जो आपको एक बार नहीं बार बार बुलाएगा।


उदयपुर के बारे में ये सरस, सुंदर बातें हमें लिख भेजी हैं पूनम शर्मा ने। अपने शहर के अलावा पूनम को जानवरों और बच्चों से बेइंतहा प्यार है। पूनम के सोशल मीडिया अकाउंट जानवरों के प्रति स्नेह से भरे हैं। बेहद खुशदिल इंसान हैं पूनम। हर एक दिन को जीवंत करना है, ये इन्हें बखूबी आता है। गाने सुनने और गुनगुनाते रहना का बड़ा शौक है। और हां, खाना ऐसा लजीज बनाती हैं कि मेहमान इनके घर को अपना ही घर मान बैठते हैं।


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