वृंदावन के मंदिरों की वो बातें जो आपको गूगल भी नहीं बता पाएगा

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वृंदावन राधा और कृष्ण के कृतित्व की धरती है। राधा की नगरी बरसाना, वृंदावने से तकरीबन तीस किलोमीटर की ही दूरी पर है। वृंदावन में सॉरी बोलने से लेकर साइड मांगने तक राधे-राधे के कोड वर्ड में ही बातें की जाती हैं। वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर की फूल वाली होली तो विश्व प्रसिद्ध है। वृंदावन में कदम कदम पर अति प्राचीन मंदिर विद्यमान हैं। आज हम आपको इन मंदिरों से जुड़ी वो रोचक बातें बताने वाले हैं जो आपको गूगल पर भी ढूंढे नहीं मिलेगी।

गोपीनाथ मंदिर

गोपीनाथ नाथ मंदिर को बसाया था जहानवा नाम की एक विधवा महिला ने। अगर आपको वृंदावन में कोई विधवाओं से दुर्व्यहवार होता दिखे तो लोगों को याद दिलाइएगा कि कान्हा-राधा की इस नगरी को एक विधवा ने ही बसाया था। यह मंदिर कम से कम चार सौ अस्सी साल पुराना है। जहानवा बंगाल से आयी थीं इसलिए इस मंदिर में आपको बंगाली संस्कृति की छाप जरूर देखने को मिलेगी। 2013 में इसी मंदिर में सुलभ इंटरनेशनल ने विधवा होली का  प्रारंभ किया था जो अब तक चल रहा है।

इस मंदिर के बीचोबीच आपको एक प्राचीन नगाड़ा देखने को मिल जाएगा। गोपीनाथ मंदिर अकेला ऐसा मंदिर है जहां कृष्ण के साथ राधा या रूक्मणी नहीं बल्कि एक गोपी को रखा गया है। माना जाता है कि एक बार गोपी ने कृष्ण से शिकायत की थी कि उनके साथ हमेशा राधा या रूक्मणी ही होती हैं, और किसी को जगह नहीं मिलती। उस गोपी ने तपस्या की और तपस्या के पश्चात उसे कृष्ण के बगल में स्थान मिला।

गोविंद देव मंदिर

सबसे प्राचीन होने के बावजूद भी इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ थोड़ी कम रहती है क्योंकि लोग इस मंदिर के इतिहास को नहीं जानते। यहां ज्यादातर बंगाली श्रद्धालु ही आया करते हैं। इस मंदिर के साथ औरंगजेब के साथ जुड़ी एक मान्यता भी है। माना जाता है कि यह सात मंजिला मंदिर था जिसके ऊपर एक दीपक रखा था। इस विशाल दीपक में  हर रोज 7 मन (तकरीबन 50-55 किलो) घी डाला जाता था। उसकी रोशनी बहुत दूर-दूर तक फैलती थी। एक बार औरंगजेब आगरा से इधर आ रहा था। अमावस्या की रात थी।

औरंगजेब को लगा कि आकाश में उतना अंधेरा नहीं है जितना होना चाहिए। पूछने पर उसके एक मंत्री ने बताया कि वृंदावन के गोविंद देव मंदिर में जो दीपक जलता है यह उसकी रोशनी के कारण है। औरंगजेब को बहुत क्रोध आया और उसने मंदिर तुड़वाने का आदेश दिया। औरंगजेब के आदेश से मंदिर पर आक्रमण किया गया। कुछ दिन पहले ही गर्भ गृह की मुर्तियों को जयपुर के मंदिरों में शिफ्ट कर दिया गया था, इसलिए मूर्तियां सहीसलामत हैं। लेकिन अब गोविंद देव की केवल चार मंजिलें बाकी हैं और उस दीपक का नामों निशान तक नहीं।

मदन मोहन मंदिर

मदन मोहन मंदिर में एक बहुत बड़ा घंटा हुआ करता था। उस वक्त एक डाकू ने उसे चुराने की चुनौती दी थी। डाकू के डर से तीन तरफ से मंदिर को घेर लिया गया और चौथी तरफ थी यमुना। डाकू यमुना की तरफ से ताक लगा कर बैठ गया। हर बीतते घंटे पर जब मंदिर का घंटा बजता था, तब डाकू दीवार पर एक वार करता था ताकि घंटे की आवाज में हथौड़े की आवाज दब जाए। ऐसा करते करते डाकू सुबह तक ऊपर चढ़ गया और घंटे को चुरा कर ले गया।

ये थे वृंदावन के सबसे प्राचीन मंदिर और उनसे जुड़ी कुछ तमाम बातें, जिनके बारे बहुत तम लोग ही जानते हैं। ज्यादातर श्रद्धालु वृंदावन जा कर बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, निधिवन, जन्मभूमि तक ही सीमित रह जाते हैं। पर इस बार अगर आपको मौका लगे तो सही मायनों में वृंदावन के देख कर आएं। इन प्राचीन मंदिरों की तरफ भी रखें जिनके कारण वृंदावन इतना समृद्ध है।


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